राज्य में कार्यरत उपभोक्ता आयोग के सदस्यों को सेवा अवधि समाप्त होने पर भी रिलीव नहीं करे
जोधपुर, 09 जुलाई । राजस्थान उच्च न्यायालय की खंडपीठ के वरिष्ठ न्यायाधीश विनीत कुमार माथुर और न्यायाधीश चंद्र शेखर शर्मा ने राज्य सरकार के खाद्य, आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामलात के प्रमुख सचिव के प्रार्थना पत्र पर गत 18 मार्च के आदेश पर स्पष्ट किया कि राज्य में कार्यरत उपभोक्ता आयोग के सदस्यों को वैधानिक नियमानुसार 65 वर्ष और अध्यक्ष पद पर 67 वर्ष की आयु तक सेवा अवधि समाप्त होने पर भी रिलीव नहीं करे और सेवानिवृत हो चुके अध्यक्ष और सदस्यों को पुन: कार्य पर लें।
प्रमुख सचिव की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश पंवार ने प्रार्थना पत्र पेश कर कहा कि उपभोक्ता अधिनियम प्रावधानों के तहत निर्धारित अधिकतम आयु तक ही सेवा विस्तार दिया जाए और सेवानिवृत हो चुके अध्यक्ष और सदस्यों को पुन: सेवा में लेने पर राज्य सरकार पर बहुत ही ज्यादा आर्थिक भर बढ़ जाएगा। राजस्थान हाइकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन की ओर से अधिवक्ता अनिल भंडारी ने कहा कि राज्य सरकार ने अभी तक वास्तविक रूप से 18 मार्च के आदेश का पूर्ण क्रियान्वन नहीं किया है।
उन्होंने कहा कि जिला और राज्य उपभोक्ता आयोग में स्टेनोग्राफर और मंत्रालयिक कर्मचारियों के काफी पद रिक्त होने से आयोग की न्यायिक कार्यवाही बाधित हो रही है। उन्होंने कहा कि राज्य और जिला आयोग अध्यक्ष और सदस्यों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद भी निर्धारित वेतन और भत्ते नहीं दिए जा रहे है,जबकि अनेक राज्यों ने इसकी पालना कर दी है, जिससे कामकाज प्रभावित हो रहा है।
खंडपीठ के वरिष्ठ न्यायाधीश विनीत कुमार माथुर और न्यायाधीश चंद्र शेखर शर्मा ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि आगामी पेशी 5 अगस्त तक इन सभी बाबत प्रगति से अवगत कराएं।









