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खूंटी में पेसा नियमावली-2025 के खिलाफ आदिवासी समाज का विरोध, संशोधन की मांग को लेकर सौंपा ज्ञापन

खूंटी, 15 अप्रैल । पारंपरिक ग्रामसभा समन्वय समिति, झारखंड के बैनर तले आदिवासी समाज ने पेसा झारखंड नियमावली-2025 के विरोध में आवाज उठाई है। बुधवार को आदिवासी समाज के एक प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त आर. रॉनिटा से मुलाकात कर राज्य के मुख्यमंत्री, राज्यपाल और पंचायत राज मंत्री के नाम एक विस्तृत स्मार-पत्र (ज्ञापन) सौंपा।

सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि पेसा झारखंड नियमावली-2025 के माध्यम से सरकार पारंपरिक ग्रामसभाओं को नजरअंदाज कर सरकारी ग्रामसभा की प्रक्रिया लागू कर रही है, जो पेसा कानून 1996 की मूल भावना के विपरीत है। समिति का आरोप है कि ग्रामसभा के गठन, संचालन और बैंक खाते जैसी व्यवस्थाओं में सरकारी हस्तक्षेप बढ़ाया जा रहा है, जबकि पेसा कानून ग्रामसभा को एक स्वायत्त इकाई के रूप में मान्यता देता है।

इस दौरान ग्लैडसन डुंगडुंग, दामू मुंडा, मार्शल बारला, बिनसाय मुंडू और भोला पाहन सहित कई पारंपरिक नेता मौजूद रहे। प्रतिनिधियों ने एक स्वर में कहा कि नई नियमावली आदिवासियों की सदियों पुरानी पारंपरिक ग्रामसभा व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास है।

आदिवासी नेताओं ने यह भी कहा कि नियमावली के तहत पंचायत सचिव जैसे सरकारी कर्मियों को पारंपरिक ग्रामसभा में भूमिका देना पूरी तरह अनुचित है। पेसा कानून-1996 के अनुसार ग्रामसभा के सदस्य केवल वही होते हैं, जिनका नाम गांव की मतदाता सूची में दर्ज होता है, ऐसे में बाहरी हस्तक्षेप पारंपरिक व्यवस्था को कमजोर करता है।

समिति ने यह भी आरोप लगाया कि झारखंड उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद बनी इस नियमावली में पेसा कानून 1996 के 23 प्रावधानों का समुचित पालन नहीं किया गया है। इसे आदिवासी स्वशासन व्यवस्था पर हमला बताते हुए नेताओं ने सरकार से तत्काल संशोधन की मांग की।

प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त के माध्यम से राज्यपाल, मुख्यमंत्री और पंचायत राज मंत्री से आग्रह किया कि जब तक नियमावली को पेसा कानून-1996 के अनुरूप संशोधित नहीं किया जाता, तब तक अनुसूचित क्षेत्रों में ग्रामसभा गठन की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए।

मौके पर उपस्थित लोगों ने अपनी पारंपरिक ग्रामसभा व्यवस्था को बचाने का संकल्प लिया और चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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