वीआईपी ड्यूटी के चलते तहसीलदारों का काम 4 घंटे देरी से शुरू, लोग 6 घंटे परेशान!
**अमृतसर में प्रॉपर्टी रजिस्ट्री में हुई खामियां, सिस्टम पर उठाए सवाल**
अमृतसर के तहसील कार्यालयों में एक महीने बाद प्रॉपर्टी रजिस्ट्री की जिम्मेदारी तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को सौंप दी गई। लेकिन प्रारंभिक दिन में ही यहां के अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे। पहले दिन चार घंटे की देरी से आने वाले अधिकारियों के कारण रजिस्ट्री कार्य में बहुत सी समस्याएं सामने आईं। तहसील-1 में सब-रजिस्ट्रार की वीआईपी ड्यूटी के चलते कार्यालय में छह घंटे तक लोगों को इंतजार करना पड़ा। इस दौरान, रजिस्ट्री क्लर्क और अन्य कर्मचारी अपनी सीटों से गायब रहे, जिसके कारण आम जनता को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा।
वीआईपी ड्यूटी के कारण रजिस्ट्री प्रक्रिया में व्यवधान उत्पन्न हुआ, जिससे न सिर्फ आमजन परेशान हुए, बल्कि वकील और अधिवक्ता भी इस सिस्टम से त्रस्त रहे। इस दिन 318 अपॉइंटमेंट में से मात्र 60 रजिस्ट्री सफल हो पाई। जबकि दूसरी तहसील में 129 और पहली तहसील में 82 रजिस्ट्री कराई गई। यह स्थिति दर्शाती है कि प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्ययोजना नहीं है और रजिस्ट्री दफ्तरों में काम करना पूरी तरह से भगवान भरोसे हो गया है।
अधिकारियों के बीच आपसी मनमुटाव के बाद रजिस्ट्री का काम भले ही सौंप दिया गया है, लेकिन सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में आम जनता की सुनवाई करने वाला कोई नहीं था। सब-रजिस्ट्रार-1, जिन्हें दफ्तर आने के लिए कहा गया था, अचानक काम छोड़कर चले गए, जिससे रजिस्ट्री का कार्य और भी प्रभावित हुआ। वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश शर्मा ने इस स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि लोग करोड़ों की रजिस्ट्री के लिए आते हैं, लेकिन अधिकारियों की कामचोरी और वीआईपी कल्चर के चलते उन्हें कोई राहत नहीं मिल पा रही।
महिंदरपाल गुप्ता, एक अन्य वरिष्ठ अधिवक्ता, ने प्रशासन को सुझाव दिया कि उन्हें वीआईपी ड्यूटी की जगह किसी अन्य अधिकारी को चार्ज देना चाहिए ताकि रजिस्ट्री का कार्य सुचारू रूप से चल सके। शनिवार को देर शाम एसडीएम-2 मनकंवल सिंह ने रजिस्ट्री कार्यालय में मीटिंग की और अंततः दस्तावेजों की तस्दीक करनी शुरू की। हालांकि, कई लोग निराश होकर घर लौट गए क्योंकि उनके दस्तावेजों की तस्दीक नहीं हो पाई।
सारांश के रूप में, प्रशासन की यह स्थिति दर्शाती है कि जनता की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता में नहीं है। सरकारी दावों के विपरीत, ग्राउंड लेवल पर स्थिति बहुत खराब है। यह भी स्पष्ट है कि यदि अधिकारियों की प्राथमिकता वीआईपी सुविधाओं को आगे बढ़ाना है, तो आम जनता की समस्याएं निरंतर बढ़ती रहेंगी। प्रशासन को अपने सिस्टम में सुधार करने की सख्त आवश्यकता है, अन्यथा यह परेशानी और बढ़ती जाएगी।









