भूमि पर कब्जे को लेकर दर्ज एफआईआर रद्द करने से इनकार
जयपुर, 01 मई । राजस्थान हाईकोर्ट ने मानसरोवर में निचली अदालत के स्टे शुदा भूमि पर कब्जा करने से जुड़े मामले में आरोपी प्रमोद शर्मा सहित अन्य के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने से इनकार कर दिया है। जस्टिस उमाशंकर व्यास की एकलपीठ ने यह आदेश प्रमोद शर्मा की ओर से दायर आपराधिक याचिका को खारिज करते हुए दिए।
याचिका में कहा गया कि उसके खिलाफ गत 13 जुलाई को मानसरोवर थाने में भूमि पर कब्जा करने की एफआईआर दर्ज कराई गई है। जबकि एफआईआर में उस पर कोई स्पष्ट आरोप नहीं लगाया गया है। इसके अलावा वह भूमि से जुड़ी दोनों गृह निर्माण सहकारी समितियों के कार्यों से जुड़ा हुआ नहीं है। इसके अलावा एफआईआर में ही बताया गया है कि जमीन को लेकर बीते दो दशक से पथिक गृह निर्माण सहकारी समिति और नवजीवन गृह निर्माण सहकारी समिति के बीच सिविल विवाद चल रहा है। ऐसे में सिविल मामले को आपराधिक प्रकरण में बदलने के लिए यह एफआईआर दर्ज कराई गई है। एफआईआर के अनुसार सितंबर-अक्टूबर 2024 में कब्जा करने की बात कही है तो फिर 17 जुलाई, 2025 तक एफआईआर दर्ज क्यों नहीं कराई गई। ऐसे में उसके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द किया जाए। जिसका विरोध करते हुए परिवादी घनश्याम शर्मा के वकील गिर्राज प्रसाद शर्मा ने कहा कि आरोपी अपने आप को मुख्यमंत्री का साला बताकर प्रभाव जमाता है। जब पुलिस ने जांच के दौरान गत 15 अप्रैल और 17 अप्रैल को नोटिस दिया तो उसने यह याचिका दायर कर दी। जबकि अभी मामले में अनुसंधान शुरू ही हुआ है। इसके अलावा महाधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद ने भी अनुसंधान लंबित होने का हवाला दिया। सभी पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया।
गौरतलब है कि पथिक गृह निर्माण सहकारी समिति के अध्यक्ष घनश्याम शर्मा ने बीते साल 13 जुलाई को मानसरोवर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें कहा था कि दोनों सोसायटी के बीच विवाद के कारण निचली अदालत ने बदरवास में स्थित इस करीब ढाई बीघा जमीन पर स्टे दिया था। नवजीवन सोसायटी के कुछ पदाधिकारियों ने प्रमोद शर्मा सहित अन्य लोगों से मिलकर उस पर कब्जा कर लिया।









