ASI-HC की करतूत: अरंडी छिलके से छुपाया डोडा-पोस्त; ग्रामीणों का हंगामा, दो सस्पेंड!

जोधपुर ग्रामीण पुलिस के पीपाड़ शहर थाने में हाल ही में एक सनसनीखेज घटना घटित हुई है, जिसने कई पुलिस अधिकारियों के होश उड़ा दिए हैं। यहाँ थाने के मालखाने में रखे मादक पदार्थों की जब्ती के दौरान सामने आया है कि 36 किलो डोडा-पोस्त की बजाय छिलके भरे हुए थे। यह खुलासा तब हुआ जब मादक पदार्थों को नष्ट करने की प्रक्रिया के तहत एक अधिकृत कमेटी ने कट्टों की जांच की। इस जांच में तथ्य सामने आया कि पुलिस के दो कर्मियों ने मिलकर यह धोखाधड़ी की है।

इस मामले की गहराई में जाकर जांच करने पर, पुलिस अधीक्षक (एसपी) राममूर्ति जोशी ने बताया कि हर साल फरवरी में विभिन्न थानों से जब्त मादक पदार्थों को नष्ट किया जाता है। इसके लिए न्यायालय से आदेश प्राप्त करने के बाद, पुलिस अधीक्षक कार्यालय से भी अनुमति ली जाती है। लेकिन इस बार पीपाड़ थाना में जो घटा, वह पुलिस विभाग के लिए शर्मनाक सिद्ध हुआ। जब कमेटी ने जब्त किए गए डोडा-पोस्त के कट्टों को खोला, तो उसमें अरंडी के छिलके पाए गए, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि वास्तविक मादक पदार्थों का गबन किया गया है।

आगे की जांच में पता चला कि इस चोरी के पीछे एएसआई श्रवणराम और पीपाड़ थाने के हैड कांस्टेबल लियाकत अली का हाथ था। इन दोनों के बीच किसी प्रकार की मिलीभगत का संकेत मिला। एडीशनल एसपी द्वारा कराई गई जांच से मामले की गंभीरता और बढ़ गई। एसपी जोशी ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया और उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई।

इस घटनाक्रम ने जोधपुर ग्रामीण पुलिस के ढांचे में गहरी चिंता पैदा की है। मादक पदार्थों से संबंधित मामलों में ऐसे अनुचित कार्यों का होना न केवल पुलिस की छवि को धूमिल करता है, बल्कि जनता के विश्वास को भी कमजोर करता है। इस प्रकार की गतिविधियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति न हो सके। अधिकारियों ने इस मुद्दे की गंभीरता को समझते हुए पूरे विभाग में इस तरह के मामलों में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित करने का संकल्प लिया है।

उम्मीद की जा रही है कि विभागीय जांच के परिणामस्वरूप इस मामले में सही कार्रवाई होगी, और आरोपी पुलिस कर्मियों के खिलाफ उचित दंड दिया जाएगा। इस मामले ने न केवल स्थानीय लोगों में बल्कि पूरे राज्य में पुलिसिंग के सिद्धांतों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सभी को उम्मीद है कि ऐसी घटनाएँ दोबारा न हों, ताकि पुलिस विभाग में जनता का विश्वास बना रहे।