जालंधर में ढाबे पर बवाल: सिख संगठन नानक सरूप नाम पर मांसाहार परोसने से नाराज!

जालंधर के एक पॉश इलाके में स्थित ढाबे के सामने सिख संगठनों से जुड़े व्यक्तियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस ढाबे का नाम नानक सरूप रखा गया है, जबकि यह शराब के ठेके के पास स्थित है। इसके अलावा, ढाबे के पास ही एक अन्य धाबे पर चिकन और अंडे बेचे जा रहे थे, जो सिख धर्म की शिक्षाओं के खिलाफ है। सिख संगठनों ने स्थानीय पुलिस से अविलंब कार्रवाई की मांग करते हुए ढाबे का बैनर फाड़ दिया। यह ढाबा एक महिला द्वारा संचालित किया जा रहा था, जिसके परिणामस्वरूप महिला ने अपनी दुकान का शटर गिरा दिया।

प्रदर्शन के बाद, सूचना मिलते ही थाना डिवीजन नंबर-6 (मॉडल टाउन) के एसएचओ अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे ताकि मामले की जांच की जा सके। इस दौरान, सिख संगठनों के नेता हरविंदर सिंह ने दावा किया कि जालंधर के श्री गुरु तेग बहादुर नगर चौक (मेनब्रो चौक) पर चलाया जा रहा यह ढाबा वास्तव में एक अहाता है और इसे सिख समुदाय की भावनाओं को आहत करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जब वे ढाबे पर पहुंचे, तो वहां अंदर लोग शराब का सेवन कर रहे थे और चिकन का आनंद ले रहे थे, जो सिख समुदाय के प्रति अपमानजनक है।

हरविंदर सिंह ने अपने बयान में कहा कि इस तरह के कार्यों से सिखों की आस्था पर चोट पहुंच रही है। ढाबा संचालक द्वारा गुरुों के नाम का उपयोग करके लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। उनका आरोप है कि आपको ऐसे स्थानों पर जाकर ज़िम्मेदारी से काम करना चाहिए, ना कि सिख धर्म की गरिमा को ठेस पहुंचाते हुए ऐसे स्थानों का संचालन करना चाहिए। उनका यह भी कहना था कि यह माहौल बिगाड़ने की एक सोची-समझी कोशिश है, इसलिए सिख संगठनों ने इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई।

उनकी बात से यह स्पष्ट होता है कि यह मामला केवल एक ढाबे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सिख समाज की धार्मिक भावनाओं और उनके प्रति हो रहे अपमान का प्रश्न है। सिख समुदाय के लोगों ने एकजुट होकर इस मुद्दे पर अपनी भड़ास निकाली और सुनिश्चित किया कि ऐसे कृत्य बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। स्थानीय प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की और आश्वासन दिया कि भविष्य में ऐसी स्थितियों को रोकने के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे।

इस घटना ने सिख संगठनों में आक्रोश पैदा किया है और इसके चलते सामाजिक ताने-बाने पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। आयोजकों ने यह सुनिश्चित करने का संकल्प लिया है कि जब तक इस मामले में उचित कार्रवाई नहीं की जाती, वे अपना विरोध जारी रखेंगे। ऐसे में जालंधर शहर में सामुदायिक सौहार्द बनाए रखना एक चुनौती बन गया है, जहां विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा करना आवश्यक है।