श्रमिक अधिकारों की रक्षा के लिए 12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल
पूर्वी सिंहभूम, 24 जनवरी ।
केंद्रीय ट्रेड यूनियन एवं स्वतंत्र फेडरेशनों के संयुक्त मंच कोल्हान प्रमंडल के संयोजक विष्णु डे ने कहा कि केंद्र सरकार की मजदूर-किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ 12 फरवरी 2026 को देशव्यापी एक दिवसीय आम हड़ताल की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह हड़ताल वलिदानों से हासिल श्रमिक अधिकारों को बचाने और कॉर्पोरेटपरस्त नीतियों के खिलाफ निर्णायक संघर्ष की शुरुआत है।
शनिवार को जमशेदपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि विष्णु डे ने बताया कि केंद्र सरकार ने ट्रेड यूनियनों से बिना परामर्श किए चार श्रम संहिताएं लागू की हैं, जिनका उद्देश्य हड़ताल के अधिकार को कमजोर करना, यूनियनों को निष्प्रभावी बनाना और स्थायी नौकरियों को ठेका और अस्थायी व्यवस्था में बदलना है। उन्होंने आरोप लगाया कि नई श्रम शक्ति नीति-2025 के जरिए सामूहिक सौदेबाजी और त्रिपक्षीय संवाद की अवधारणा को समाप्त करने की कोशिश की जा रही है।
संयुक्त मंच का कहना है कि रेलवे, कोयला, स्टील, रक्षा, बैंक, बीमा, ऊर्जा और अन्य सार्वजनिक क्षेत्रों के बेलगाम निजीकरण से देश की आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था को खतरा पैदा हो गया है। साथ ही 65 लाख से अधिक रिक्त सरकारी पदों को भरने के बजाय आउटसोर्सिंग और ठेका प्रथा को बढ़ावा दिया जा रहा है। आवश्यक वस्तुएं, शिक्षा और इलाज आम जनता की पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं, जबकि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी अब तक नहीं मिली है।
ट्रेड यूनियनों की प्रमुख मांगों में चारों श्रम संहिताओं को रद्द करना, सभी कृषि उत्पादों के लिए वैधानिक एमएसपी, ठेका व अस्थायी कर्मचारियों का नियमितीकरण, सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण रोकना, मातृ उद्योग एचईसी का पुनरुद्धार, सभी के लिए शिक्षा-स्वास्थ्य-आवास की गारंटी और मजदूर-किसान हितों के खिलाफ लाए गए नए कानूनों को वापस लेना शामिल है। विष्णु डे ने झारखंड के मजदूरों, किसानों, युवाओं, छात्रों और जन संगठनों से हड़ताल को सफल बनाने की अपील की।









