मजीठिया मामले में कोर्ट में सुनवाई: SIT ने NDPS केस में सर्च वारंट की मांग की!
पंजाब में शिरोमणि अकाली दल (SAD) के नेता एवं पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ नशा तस्करी से जुड़े मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) ने मोहाली अदालत में एक महत्वपूर्ण याचिका दायर की है। इस याचिका के माध्यम से SIT ने मजीठिया के आवास पर सर्च वारंट मांगा है। इस बीच, मजीठिया के वकीलों ने भी अदालत में एक याचिका दायर की है, जिसमें उन्होंने SIT द्वारा दाखिल की गई अर्ज़ी की एक प्रति मांगी है। वकीलों ने अदालत से यह जानने का अनुरोध किया है कि वे किस स्थान की तलाशी लेने की योजना बना रहे हैं। सरकारी वकीलों ने SIT की याचिका को गलत करार दिया है, और इस मामले पर आज 5 अप्रैल को बहस होगी।
इस मामले की जड़ें उस समय में जाती हैं जब 2022 में कांग्रेस सरकार ने मजीठिया के खिलाफ FIR दर्ज की थी। उस दौरान, SIT ने भोला ड्रग्स मामले में कई FIR दर्ज की थी, जिनमें से कुछ में पहले ही अदालत अपना निर्णय सुन चुका है। मजीठिया ने इससे पहले एक वीडियो जारी कर आरोप लगाया था कि सरकार उन्हें फंसाने के लिए नए मामले दर्ज करने की योजना बना रही है और 2027 में होने वाले चुनावों से पहले उन्हें उलझाने का प्रयास किया जा रहा है।
इस बार छानबीन के लिए गठित SIT की कमान में परिवर्तन किया गया है। हाल ही में, एआईजी वरुण शर्मा को इस SIT का प्रमुख बनाया गया है, जोकि प्रशासन में उच्च रैंक का अधिकारी है। इससे पहले, DIG एचएस भुल्लर इस SIT का नेतृत्व कर रहे थे। इस बदलाव के अलावा, तरनतारन के SSP अभिमन्यु राणा और पटियाला के एसपी (एनआरआई) गुरबंस सिंह बैंस को भी SIT के नए सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।
SIT में परिवर्तन की यह प्रक्रिया अब तक की पांचवी बार हो रही है। मजीठिया मामले में अब तक की जांच में बड़े बदलाव हुए हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि राज्य सरकार इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है। गुजरे हुए दिनों में SIT के प्रमुख हमेशा DIG या उससे अधिक रैंक के अधिकारी रहे हैं, लेकिन इस बार एआईजी रैंक के अधिकारी को SIT का मुखिया बनाए जाने के निर्णय ने जांच प्रक्रिया को एक नया मोड़ दिया है।
यह मामला न केवल राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे नशा तस्करी के खिलाफ पंजाब सरकार की मुहिम को भी एक नई दिशा मिल रही है। पंजाब में नशे की समस्या लगातार बढ़ रही है और ऐसे मामलों की अच्छी तरह से जांच कराना अत्यंत आवश्यक है। अब देखना होगा कि अदालत में होने वाली बहस और SIT की कार्यवाही इसका क्या परिणाम देती है। सभी की निगाहें इस मामले पर टिकी हुई हैं, और आने वाले समय में और भी पहलुओं की जानकारी सामने आ सकती है।









