पंच परिवर्तन के संकल्प के साथ आगे बढ़ेगा संघ : आलोक कुमार
शिमला, 06 मई । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह आलोक कुमार ने कहा कि संघ अपने शताब्दी वर्ष में “पंच परिवर्तन” के पांच प्रमुख विषयों कुटुंब प्रबोधन, स्व की भावना, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता और नागरिक कर्तव्य पर विशेष रूप से कार्य करेगा, जिससे समाज में सकारात्मक और स्थायी बदलाव लाया जा सके।
शिमला में एक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए आलोक कुमार ने कहा कि बीते वर्षों में देश की परिस्थितियों में व्यापक बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि लगभग दो दशक पहले देश के कई हिस्सों में जाने में लोगों को डर लगता था, जबकि आज स्थिति में सुधार हुआ है। कश्मीर के लाल चौक का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जहां पहले कोई सार्वजनिक उत्सव मनाना मुश्किल था, वहीं अब लोग रात में भी नए साल का जश्न मना रहे हैं।
उन्होंने संघ के इतिहास का उल्लेख करते हुए बताया कि हजारों स्वयंसेवकों ने स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया और विभाजन के दौरान विस्थापितों की सहायता के लिए तीन हजार से अधिक शिविर लगाए। उन्होंने कहा कि एक छोटे संगठन के लिए यह बहुत बड़ा कार्य था। इसके अलावा गोवा और हैदराबाद के आंदोलनों में भी संघ की भूमिका रही और देश के विभिन्न हिस्सों में संगठन ने सक्रिय रूप से काम किया।
आलोक कुमार ने कहा कि संघ देश की सभी भाषाओं को राष्ट्रीय मानता है, जिससे उसे व्यापक स्वीकार्यता मिली है। पंजाब में कठिन परिस्थितियों के दौरान भी संघ ने कार्य किया और भारत माता की जय को जन-जन का नारा बनाया।
उन्होंने पंच परिवर्तन के पांच विषयों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कुटुंब प्रबोधन के तहत परिवारों को सशक्त बनाना, संस्कार देना और परंपराओं का निर्वहन सुनिश्चित करना जरूरी है। “स्व” की भावना पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि देश आज आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है और कई देशों को अनाज व बिजली उपलब्ध करा रहा है।
पर्यावरण संरक्षण पर उन्होंने विशेष चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि शिमला जैसे शहर, जो सीमित आबादी के लिए बने थे, आज अत्यधिक दबाव झेल रहे हैं। जल संरक्षण की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि नदियों का प्रदूषण गंभीर समस्या बन चुका है और छोटे-छोटे प्रयासों से इसे सुधारा जा सकता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि इस बार कुंभ में प्लास्टिक के बर्तनों के उपयोग पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया है।
सामाजिक समरसता के विषय पर उन्होंने कहा कि जाति के आधार पर भेदभाव मानवता के विरुद्ध है और समाज में सभी को समान दृष्टि से देखना चाहिए। साथ ही नागरिक कर्तव्य बोध पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों के प्रति भी सजग रहना चाहिए और दूसरों के अधिकारों का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संघ शताब्दी वर्ष के अवसर पर इन पांच विषयों के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रतिबद्ध है।









