जालंधर में धार्मिक झंडा फेंका: दो भाई गिरफ्तार, श्री गुरु रविदास जयंती से पहले हंगामा
श्री गुरु रविदास जी महाराज के प्रकाश पर्व के आयोजनों की तैयारियों के मद्देनजर जालंधर में एक गंभीर बेअदबी का मामला उभरकर सामने आया है। जालंधर देहात के मेहतपुर थाने की पुलिस ने इस मामले में दो भाइयों को आरोपी बनाते हुए उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की है। समाज में इस मुद्दे को लेकर भारी आक्रोश फैला हुआ है, और रविदास समुदाय के लोग आरोपियों के खिलाफ कठोर सजा की मांग कर रहे हैं। आरोपियों का नाम अर्शदीप सिंह और कर्णदीप सिंह है, जो मेहतपुर के अदरामण गांव के निवासी माने जा रहे हैं। पुलिस ने बीएनएस की धारा 298/3(5) के तहत उनके खिलाफ मामला दर्ज किया है।
घटना की जानकारी के अनुसार, रविवार यानी कल शाम करीब चार बजे दोनों भाइयों ने अपने गांव में स्थापित श्री गुरु रविदास जी महाराज के झंडे को फाड़ कर गलती से फेंक दिया। यह जानकारी नवदीप कुमार नामक एक स्थानीय निवासी ने पुलिस को दी, जिसने बताया कि गांव में इस समय पर्व को लेकर झंडे लगाए गए थे। जब नवदीप के पास कुछ समुदाय के लोग पहुंचे और इस घटना के बारे में बताया, तो उन्होंने तुंरत इसकी सूचना पुलिस को दी।
बताया गया है कि अर्शदीप और कर्णदीप दोनों भाई एक दुकान चलाते हैं। नवदीप कुमार ने पुलिस को दिए गए अपने बयान में कहा कि दोनों भाई झंडे को पहले तो टेढ़ा कर देते हैं और फिर उसे गंदी जगह पर फेंक देते हैं। इस घटना ने रविदास समुदाय के लोगों को बेहद उत्तेजित कर दिया, क्योंकि इसे एक धार्मिक बेअदबी के रूप में देखा जा रहा है। इसके बाद, नवदीप की टीम ने मिलकर पुलिस में शिकायत दी, जिसके आधार पर देर रात पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपी भाइयों को गिरफ्तार कर लिया।
नवदीप ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपियों ने वारदात के समय नशे की हालत में थे, जो उनके इस कृत्य का मुख्य कारण बताया गया। आरोपियों से वर्तमान में पुलिस पूछताछ कर रही है ताकि इस मामले की पूरी जानकारी प्राप्त की जा सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि दोषियों को उचित सजा मिले।
रविदास समुदाय की ओर से इस वृत्तांत को लेकर व्यापक विरोध एवं सख्त कदम उठाने की मांग की जा रही है। असल में, इस घटना ने सामूहिक रूप से धार्मिक भावनाओं को आहत किया है, और अब इस बात पर ध्यान दिया जा रहा है कि समुदाय अपने अधिकारों के लिए कैसे लड़ाई लड़ेगा। बीते कुछ वर्षों में इस प्रकार की घटनाएँ कई बार सामने आ चुकी हैं, जिससे समाज में धार्मिक असमानता की भावना बढ़ रही है, और ऐसे में सकारात्मक सुधार की आवश्यकता महसूस हो रही है।









