NRI पति की धोखाधड़ी: स्पाउस वीजा से कनाडा भागा, ससुर बोले- 15 लाख मांगे थे!
पंजाब के कपूरथला जिले से एक अत्यंत चौंकाने वाली घटना प्रकाश में आई है, जिसमें एक एनआरआई पति ने अपनी पत्नी के साथ गंभीर धोखाधड़ी की है। यह मामला तब सुर्खियों में आया, जब पीड़िता के पिता ने आरोपी पति के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उनके आरोपों के आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह मामला केवल घरेलू विवाद नहीं, बल्कि गंभीर कानूनी प्रश्नों से जुड़ा हुआ है।
पीड़िता के पिता, जिन्होंने भाखड़ियाना में अपने परिवार का पालन-पोषण किया है, ने बताया कि उनकी बेटी की शादी 2019 में जालंधर निवासी सुरजीत कुमार से हुई थी। इस विवाह के बाद, पीड़िता अपनी नई जिंदगी के लिए कनाडा चली गई, जहां उसने अपने पति के लिए स्पाउस वीजा की व्यवस्था की। लेकिन यही वीजा उनके लिए किस तरह की संकट का कारण बन गया, यह जानकर हर कोई हैरान है। पिता का दावा है कि ससुराल पक्ष ने उनकी ओर से 15 लाख रुपए दहेज की मांग की थी, जो कि भारतीय समाज में एक गंभीर समस्या का रूप ले चुकी है।
सूत्रों के अनुसार, एक वर्ष पहले सुरजीत कुमार स्पाउस वीजा पर कनाडा पहुंच गया, लेकिन वह अपनी पत्नी से मिलने नहीं गया। यह तो केवल शुरुआत थी, इसके बाद पैसों की मांग का सिलसिला शुरू हुआ। पीड़िता के पिता के अनुसार, आरोपित पति ने अपनी पत्नी से भी लाखों रुपए हड़प लिए, जो कि इस रिश्ते की गहरी निराशा को दर्शाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि एक ऐसी शादी, जो प्रेम और विश्वास पर आधारित होनी चाहिए, वह धोखाधड़ी और मुसीबतों में क्यों बदल गई?
इस मामले की सच्चाई जानने के लिए एनआरआई थाना पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है, जिनमें धारा 406 (विश्वासघात), 417 (धोखाधड़ी) और 498-A (दहेज उत्पीड़न) शामिल हैं। यह कानूनी कार्रवाई इस बात का संकेत है कि घरेलू मामलों में कानून की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण हो जाती है, विशेषकर जब बात दहेज उत्पीड़न और विश्वासघात की हो।
इस तरह के मामले समाज में दहेज की प्रथा और रिश्तों में विश्वास की कमी को उजागर करते हैं। केवल कानून के जरिए ही नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग को भी इस पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। ऐसे मामलों का स्थानांतरण ना केवल व्यक्तिगत स्तर पर, बल्कि समाज पर भी बड़ा असर डालता है। आशा है कि यह मामला एक नए कानूनी दृष्टिकोण और नीतिगत बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाने का कारण बनेगा, जिससे भौतिक संसाधनों की अहमियत के बजाय रिश्तों में विश्वास और सम्मान को प्राथमिकता दी जा सके।









