पूर्व मंत्री सोम प्रकाश का खुलासा: पंजाब चुनाव है सिर्फ ड्रामा, सरकार फैला रही धांधली!

पंजाब में पंचायत चुनाव को लेकर राजनीतिक संग्राम जारी है, जिसमें विभिन्न पार्टियां एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रही हैं। मंगलवार को आम आदमी पार्टी के नेताओं ने पंजाब चुनाव आयोग से मुलाकात की, जिसके बाद आज भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पूर्व केंद्रीय मंत्री सोम प्रकाश ने राज्य की वरिष्ठ राजनीतिक लीडरशिप के साथ चंडीगढ़ में चुनाव आयोग के अधिकारियों से चर्चा की। सोम प्रकाश ने कहा कि कपूरथला में धांधली की एक बड़ी शिकायत सामने आई है, जिसमें यह आरोप लगाया गया है कि राज्य सरकार पंचायत चुनाव को एकतरफा ढंग से कराने की कोशिश कर रही है।

सोम प्रकाश ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि जो वार्ड बंदी की गई है, उसके अनुसार वोट डालने की प्रक्रिया का पालन नहीं हो रहा है। उनका कहना है कि अगर किसी उम्मीदवार के जीतने की संभावना है, तो उस पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे चुनावी प्रक्रियाओं में अनियमितताएँ उत्पन्न हो रही हैं। उन्होंने बताया कि चुनाव आयोग को चेतावनी देते हुए कहा कि इस बार voter list में भी कई गलतियां हैं। हाल ही में राज्य सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के चलते कई उम्मीदवार बिना एनओसी के चुनाव में भाग नहीं ले पा रहे हैं, जिससे लोगों को असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है।

सोम प्रकाश ने यह भी कहा कि आम आदमी पार्टी के नेताओं को सभी सुविधाएँ मिल रही हैं, जबकि अन्य पार्टियों के नेताओं को एनओसी प्राप्त करने के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस स्थिति को देखकर ऐसा लगता है कि चुनाव केवल एक ड्रामा बनकर रह गया है और वास्तविक लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा है। गुरदासपुर में पंचायत चुनाव की बोली पर बोलते हुए, सोम प्रकाश ने कहा कि कपूरथला जिला से कई शिकायतें आई थीं, जिन्हें वह चुनाव आयोग के समक्ष लाए हैं। उन्हें आयोग से दोपहर में मिलने का समय भी मिला था।

इसके अलावा, डेरा बाबा नानक में पंचायत के प्रत्याशी द्वारा 2 करोड़ रुपये की बोली लगाने के मामले में सोम प्रकाश ने इसे बोली नहीं, बल्कि गांव के विकास के लिए राशि का प्रस्ताव बताया। उन्होंने कहा कि यह राशि विकास के कार्यों के लिए दी जाने वाली है, न कि बोली के रूप में। इस प्रकार, पंजाब की राजनीति में पंचायत चुनाव को लेकर चल रहा यह विवाद और भी गहरा होता जा रहा है, जहां सभी दल एक-दूसरे पर आरोप लगाते हुए अपने-अपने पक्ष को मजबूती देने की कोशिश कर रहे हैं।

चुनाव आयोग की भूमिका इस संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि सही और निष्पक्ष चुनाव की व्यवस्था सुनिश्चित करना आयोग की जिम्मेदारी है। ऐसे में सभी पार्टियों की शिकायतों को गंभीरता से ल लेना, और आवश्यक कदम उठाना समय की आवश्यकता है। चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता को बनाए रखना जरूरी है, ताकि जनता का विश्वास बना रहे और चुनाव का उद्देश्य सफलतापूर्वक पूर्ण हो सके।