मानसा में चौंकाने वाली वारदात: AAP वालंटियर की हत्या, पुलिस अधिकारी के रीडर पर आरोप; 9 पर FIR

पंजाब के मानसा जिले के खैरा खुर्द गांव में पंचायत चुनाव के दौरान एक गंभीर घटना घटित हुई है, जिसमें आम आदमी पार्टी (AAP) के एक वालंटियर राधे श्याम की हत्या कर दी गई। राधे श्याम की उम्र 38 वर्ष थी और परिजनों का आरोप है कि इस हत्या में एक पुलिस अधिकारी का रीडर शामिल है। पुलिस ने राधे श्याम के शव को अपने कब्जे में ले लिया है और मामले की गहन जांच शुरू कर दी है। परिजनों की ओर से लगभग 9 लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है।

घटना के समय राधे श्याम गांव में स्कूल की मैनेजमेंट कमेटी के चेयरमैन थे। स्थानीय निवासी अभय गोदारा ने बताया कि मंगलवार रात राधे श्याम उनके साथ थे, जो पंचायत चुनाव के संबंध में बैठक कर रहे थे। यह बैठक सरपंच भजन लाल के घर पर आयोजित की गई थी और राधे श्याम रात 11 बजे अपनी गाड़ी से घर लौटे। अगले दिन, सुबह 4:55 बजे अभय को शिश पाल का फोन आया, जिसमें राधे श्याम की हत्या की सूचना दी गई और उनका शव गांव के मैदान में पड़ा मिला।

मामले की जानकारी पाते ही अभय गोदारा ने सरपंच से संपर्क किया और उसके बाद सरदूलगढ़ के एसएचओ को सूचित किया, जिसके बाद पुलिस वहां पहुंची। अभय ने बताया कि उन्होंने उन नौ लोगों के नाम भी पुलिस को बताए हैं, जिन्हें हत्याकांड में शामिल माना जा रहा है। परिजनों की मांग है कि सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उल्लेखनीय है कि राधे श्याम की हत्या निजी रंजिश के चलते की गई है, जिससे उनकी जान को खतरा था।

गांव के कुछ स्थानीय लोगों ने बताया कि राधे श्याम के कुछ व्यक्तियों से पहले से ही रंजिश थी। इसके पीछे एक पुलिस अधिकारी के रीडर का हाथ होने का संदेह जताया जा रहा है, जो गांव में रिश्तेदार भी है। इस रीडर की शादी भी गांव में हुई थी, जिसके चलते गांव के कुछ व्यक्तियों के बीच संबंध खराब हो गए थे। राधे श्याम के परिवार में बच्चे हैं और उनकी पत्नी है, जो अब इंसाफ की उम्मीद में है।

इस घटना ने सभी को हिला कर रख दिया है और स्थानीय लोगों में भय का माहौल पैदा कर दिया है। पंचायत चुनाव जैसे संवेदनशील समय में हुई इस हत्या से राजनीतिक स्थिति भी अत्यधिक चिंताजनक हो गई है। गांव के लोग और परिजन पुलिस प्रशासन से न्याय की गुहार लगा रहे हैं, ताकि सभी आरोपियों को कड़ी सजा मिल सके। इस सारी स्थिति में यह जरूरी है कि संबंधित अधिकारियों और पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाई की जाए, ताकि ग्रामीणों में विश्वास बहाल हो सके।