SGPC चुनाव में पंथ विरोधी ताकतें उम्मीदवारों को खरीद रही? अध्यक्ष के गंभीर आरोप!

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (SGPC) के वार्षिक चुनावों के लिए अध्यक्ष पद के उम्मीदवारों की घोषणा के बाद, वर्तमान अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने पंथ विरोधी ताकतों की साजिशों की तीव्र आलोचना की है। उन्होंने बताया कि राजनीति में रुचि रखने वाले कुछ समूह्स, जिनमें भाजपा, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, और आरएसएस शामिल हैं, शिरोमणि कमेटी के चुनावों में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप करने का प्रयास कर रहे हैं। धामी ने कहा कि सिखों के संगठन की कमजोरियों का फायदा उठाने के लिए अशांत ताकतें विभिन्न प्रकार के उपक्रम कर रही हैं, जिससे उन्हें एकजुट रहने की आवश्यकता है।

धामी ने कहा कि सिखों का इतिहास कठिन समय से भरा हुआ है, लेकिन इस बार सदस्यों को खरीदने की कोशिशें न केवल नैतिकता के खिलाफ हैं, बल्कि सिख समुदाय की एकता को भी प्रभावित करने का प्रयास करती हैं। वे यह मानते हैं कि राजनीति में कदम रखते हुए इन शक्तियों ने कमेटी के अंदरूनी मामलों में घुसपैठ करने के लिए अभूतपूर्व तरीकों का सहारा लिया है। एडवोकेट धामी ने सिख संगठनों के उदाहरण देकर यह बताया कि कैसे सरकारी हस्तक्षेप ने पहले से ही सिख समुदाय के हितों को प्रभावित किया है।

इस स्थिति में, धामी ने सभी शिरोमणि समिति से आग्रह किया कि वह एकजुट रहें और पंथ विरोधी ताकतों की नई साजिशों से सतर्क रहें। उन्होंने कहा कि यह समय है जब सभी सदस्यों को अपनी पहचान और पंथ की भावना का संरक्षण करना चाहिए। धामी ने अपने पद के विपरीत स्वयं को कमजोर कहे जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा गुरु साहिब के प्रति श्रद्धा और विनम्रता से कार्य किया है।

शिरोमणि समिति के सभी सदस्यों को उन्होंने पंथ विरोधी गतिविधियों के खिलाफ दृढ़ता से खड़े होने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व में सभी को एकजुट होकर पंथ की सेवा करनी चाहिए और किसी भी बेईमानी के खिलाफ मजबूती से आवाज उठानी चाहिए। इस महत्वपूर्ण अवसर पर, SGPC के कई मौजूदा और पूर्व पदाधिकारी भी उपस्थित थे, जिन्होंने धामी के विचारों का समर्थन किया।

धामी का यह संबोधन एक महत्वपूर्ण मोड़ पर आया है, जब शिरोमणि Gurudwara प्रबंधक समिति के इतिहास में इस तरह की स्थिति को पहले कभी नहीं देखा गया। उन्होंने आशा जताई कि सिख समुदाय, खासकर युवा पीढ़ी, इस चुनौती को समझेगी और अपनी धार्मिक पहचान को लेकर सजग रहेगी। इस प्रकार, यह साफ है कि शिरोमणि समिति के आगामी चुनाव सिर्फ व्यक्तिगत हितों का मामला नहीं हैं, बल्कि यह सिख समुदाय की एकता और पहचान का मामला है, जिसे हर हाल में सुरक्षित रखना आवश्यक है।