पंजाब उपचुनाव में 57 दावे दाखिल, चुनाव आयोग के सुपरवाइजर नियुक्त!

पंजाब में आगामी विधानसभा उप चुनाव के लिए नामांकन भरने की प्रक्रिया आज यानी शुक्रवार को समाप्त हो गई है। राज्य की चार विधानसभा सीटों – डेरा बाबा नानक, चब्बेवाल, गिद्दड़बाहा, और बरनाला में 13 नवंबर को उप चुनाव आयोजित होने जा रहे हैं। इस अवसर पर कई प्रमुख नेताओं ने अपने-अपने नामांकन पत्र दाखिल किए। चुनाव आयोग द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार, अब तक लगभग 57 शपथ पत्र जमा किए जा चुके हैं, जिसमें कुछ उम्मीदवारों ने अपने कवरिंग कैंडिडेट्स के अलावा अतिरिक्त शपथ पत्र भी प्रस्तुत किए हैं। इसके बाद, 28 अक्टूबर को स्क्रूटनी कमेटी इन दस्तावेजों की विस्तृत जांच करेगी।

उम्मीदवारी दाखिल करने से पहले, नेताओं ने अपने-अपने चुनाव क्षेत्रों में भी शक्ति प्रदर्शन किया, जिससे उनके समर्थक और पार्टी कार्यकर्ता एकत्रित हुए। इस बार चुनाव में मुख्य मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है, क्योंकि पंजाब की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के अलावा, क्षेत्रीय पार्टी शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने चुनाव में अपने उम्मीदवार न उतारने का निर्णय लिया है। अकाली दल का यह निर्णय 1992 के बाद पहली बार है, जब पार्टी ने किसी चुनाव में चुनाव लड़ने से मना किया। पार्टी के नेतृत्व ने इसे पंथिक संकट का नतीजा बताया है।

आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के मुकाबले में, अकाली दल की अनुपस्थिति से चुनावी समीकरण में बदलाव आ गया है। इसी बीच, खालिस्तान समर्थक सांसद अमृतपाल सिंह के साथी भी उप चुनावों में भाग नहीं लेंगे। ये सभी साथी अमृतपाल के साथ डिब्रूगढ़ जेल में बंद हैं। इसी क्रम में, दलजीत कलसी ने डेरा बाबा नानक से चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया, जबकि अन्य क्षेत्र के उम्मीदवार जैसे कुलवंत सिंह राउके और भगवंत सिंह ने गिद्डड़बाहा से अपने नामांकन की घोषणा की।

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह भी लंबे समय बाद फिर से ग्राउंड पर नजर आए। उन्होंने खन्ना के अनाज मंडी में किसानों से बातचीत की और उनके सामने आ रहे समस्याओं को सुना। इस बातचीत के दौरान, उन्होंने आम आदमी पार्टी की सरकार को किसानों की समस्याओं के लिए कड़ी आलोचना की। अमरिंदर सिंह के इस निर्णय से यह साफ हो गया है कि वे राज्य में चुनावी गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल हैं और किसानों के मुद्दों को संज्ञान में लेकर चुनावी रणनीति तैयार करने में जुटे हैं।

इन सभी घटनाक्रमों के बीच, पंजाब में चुनावी माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। यह दिलचस्प रहेगा कि अगले कुछ दिनों में किस उम्मीदवार को कितनी सफलता मिलती है और राजनीतिक दल किस तरह से voter base को आकर्षित करने का प्रयास करते हैं। सभी निगाहें अब चुनावी प्रचार और विभिन्न दलों की रणनीतियों पर हैं, जिसमें किसानों की समस्या, पंथिक स्थिति, और स्थानीय मुद्दों की अहम भूमिका होगी। ऐसे में आने वाला चुनाव पंजाब की राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।