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कांकेर पुलिस ने प्रोजेक्ट संवाद के तहत तनाव प्रबंधन पर किया कार्यशाला का आयोजन

कांकेर , 22 जुलाई । जिले के पुलिस अधिकारियों, कर्मचारियों और उनके परिवारजनों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के उद्देश्य से प्रोजेक्ट संवाद के तहत तनाव प्रबंधन एवं अवसाद रोकथाम विषय पर आज बुधवार काे विशेष जागरूकता एवं परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने तनाव, अवसाद, भावनात्मक चुनौतियों और आत्महत्या की रोकथाम से जुड़े विषयों पर वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक जानकारी साझा की गई।

पुलिस अधीक्षक निखिल कुमार राखेचा के निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक योगेश साहू के मार्गदर्शन में आयोजित यह कार्यशाला पुलिस लाइन कांकेर में आयाेजित की गई थी। कार्यक्रम में डीएसपी (आईयूसीएडब्ल्यू) प्रतिभा लहरे, डीएसपी (मुख्यालय) विंकेश्वरी पिंदे, डीएसपी कविता धुर्वे, रक्षित निरीक्षक गोविंद वर्मा सहित जिले के विभिन्न थाना, चौकी एवं पुलिस लाइन के अधिकारी-कर्मचारी और उनके परिवारजन शामिल हुए। कुल लगभग 150 प्रतिभागियों ने कार्यशाला में भाग लिया। कार्यक्रम में जिला चिकित्सालय कांकेर से आए मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ आशीष जैन (साइकियाट्रिक), उमाशंकर सोनकर (क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट) एवं गार्गी वर्मा (साइकियाट्रिक सोशल वर्कर) ने पुलिस सेवा के दौरान आने वाले कार्य-दबाव, मानसिक तनाव, चिंता, अवसाद, भावनात्मक असंतुलन और आत्महत्या के जोखिम जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया।

विशेषज्ञों ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के शुरुआती लक्षणों की समय पर पहचान और आवश्यकता पडऩे पर विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श लेना बेहद जरूरी है। इससे मानसिक समस्याओं का प्रभावी उपचार संभव है, और गंभीर परिस्थितियों से बचा जा सकता है।

कार्यशाला में तनाव कम करने के व्यावहारिक उपाय, सकारात्मक सोच विकसित करने, योग एवं ध्यान की भूमिका, पर्याप्त विश्राम, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, पारिवारिक एवं सामाजिक सहयोग तथा सहकर्मियों के साथ बेहतर संवाद बनाए रखने पर भी विशेष जोर दिया गया। कांकेर पुलिस ने बताया कि प्रोजेक्ट संवाद का उद्देश्य पुलिस बल में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना, तनावमुक्त एवं सकारात्मक कार्य वातावरण तैयार करना, आत्महत्या जैसी घटनाओं की रोकथाम करना तथा पुलिस अधिकारियों, कर्मचारियों और उनके परिवारों को मानसिक रूप से सशक्त बनाना है। पुलिस ने भविष्य में भी इस तरह के जागरूकता एवं परामर्श कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करने की बात कही।