राज्यपाल गुरमीत सिंह से मिले डीजीपी दीपम सेठ, कुंभ की तैयारियों और राज्य की सुरक्षा पर मंथन
देहरादून, 11 सितंबर । राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) से शुक्रवार को लोक भवन में पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान प्रदेश की कानून-व्यवस्था, आंतरिक सुरक्षा, नशा मुक्ति अभियान, साइबर सुरक्षा, पुलिस कल्याण एवं आधुनिकीकरण तथा आगामी कुंभ मेले की तैयारियों सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।
राज्यपाल ने ‘नशा मुक्त देवभूमि’ अभियान को व्यापक जनभागीदारी के साथ प्रभावी बनाने के लिए समन्वित और परिणामोन्मुख कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने अभियान में अभिभावकों, शिक्षकों, चिकित्सकों, शिक्षण संस्थानों, सामाजिक एवं युवा संगठनों, पुनर्वास केंद्रों तथा स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने नशे की रोकथाम, जागरूकता, उपचार एवं पुनर्वास के साथ मादक पदार्थों के अवैध कारोबार के खिलाफ कठोर कार्रवाई पर भी जोर दिया।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों, विशेषकर कैंपस से बाहर निजी हॉस्टल एवं पीजी में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने ऐसे क्षेत्रों में नियमित गश्त और प्रभावी निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा शिक्षण संस्थानों के प्रबंधन के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने को कहा।
डीजीपी ने राज्य में साइबर अपराधों की रोकथाम और साइबर सुरक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासों एवं उपलब्धियों की जानकारी दी। राज्यपाल ने इन प्रयासों की सराहना करते हुए आमजन, वरिष्ठ नागरिकों, युवाओं और विद्यार्थियों को साइबर अपराधों से बचाव के प्रति जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान चलाने की आवश्यकता बताई।
आगामी कुंभ मेले के मद्देनजर राज्यपाल ने सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन की तैयारियों को समयबद्ध ढंग से मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों और संबंधित विभागों के बीच प्रभावी समन्वय तथा आधुनिक तकनीक के समुचित उपयोग के माध्यम से सुदृढ़ सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।
भेंट के दौरान पुलिस कार्मिकों एवं उनके परिवारों के स्वास्थ्य और कल्याण, आवासीय सुविधाओं, पुलिस मॉडर्न स्कूल, दुर्घटना बीमा, प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण, पुलिस आधुनिकीकरण तथा तकनीकी नवाचारों से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई। राज्यपाल ने पुलिस बल के कल्याण के साथ उसकी कार्यदक्षता और तकनीकी क्षमता को लगातार मजबूत करने पर जोर दिया।
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