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आंकडों की जगह जरूरी है कि मरीज स्‍वस्‍थ होकर जाएं अपने घर : उपायुक्‍त

बैठक में संस्थागत प्रसव, टीकाकरण, कुपोषण, परिवार नियोजन, ममता वाहन, गैर-संचारी रोगों की रोकथाम सहित समस्त स्वास्थ्य सेवाओं की प्रगति और गुणवत्ता का मूल्यांकन किया गया।

बैठक में उपायुक्त ने कहा कि सरकारी संस्थानों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखना बेहद जरूरी है और केवल आंकड़ों पर निर्भर रहने से ज्यादा जरूरी है कि हर मरीज इलाज से संतुष्ट होकर अपने घर लौटे। सदर अस्पताल में डायलिसिस सुविधा की समीक्षा की गई जहां अप्रैल से नवंबर माह तक 835 मरीजों ने इस सेवा का लाभ लिया। उपायुक्त ने डायलिसिस यूनिट के बेहतर संचालन और मरीजों की उचित देखभाल का निर्देश दिया। घाटशिला अनुमंडल अस्पताल में भी डायलिसिस सेवा को सुदृढ़ करने के निर्देश दिया गया, ताकि मरीजों को डायलिसिस के लिए जमशेदपुर आने की आवश्यकता न पड़े।

संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता देने का निर्देश

अनुमंडल अस्पताल में सी-सेक्शन से इलाज की गुणवत्ता की भी समीक्षा की गई। उपायुक्त ने सभी स्वास्थ्य विभागीय पदाधिकारियों और विशेषकर एमओआईसी को संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता देने एवं लोगों के मध्य जागरूकता फैलाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि गर्भावस्था के पहले एएनसी (गर्भावस्था पूर्व देखभाल) रजिस्ट्रेशन में सुधार लाया जाए और चौथे एएनसी तक नियमित फॉलोअप सुनिश्चित किया जाए ताकि संस्थागत प्रसव का स्तर बेहतर हो। सभी लाभार्थियों को जननी सुरक्षा योजना और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के लाभ देने देने पर भी बल दिया गया ताकि कोई भी योग्य लाभुक स्वास्थ्य योजनाओं से वंचित न रहे।

बैठक में बहरागोड़ा, चाकुलिया, पटमदा और गोलमुरी-जुगसलाई प्रखंडों में टीकाकरण की प्रगति संतोषजनक नहीं पाई गई, इसके लिए विशेष कार्ययोजना बनाने और क्रियान्वयन के निर्देश दिया गया। बैठक में ममता वाहन की संख्या बढ़ाने की जरूरत जताई गई और प्रत्येक पंचायत में कम से कम एक वाहन उपलब्ध कराने के लिए एमओआईसी और बीडीओ की बैठक करने को कहा गया।

वहीं डेंगू और मलेरिया जैसी मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए फॉगिंग, जागरूकता अभियान और नेशनल वेक्टर बॉर्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम के तहत सभी गतिविधियों की कड़ी निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिया गया। इसके साथ ही राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम, टीबी उन्मूलन अभियान और दूरस्थ क्षेत्रों में एनीमिया जांच कार्यों के विस्तार पर भी जोर दिया गया।

परिवार नियोजन के अंतर्गत नसबंदी जैसी स्थायी उपाय प्रखंड स्तरीय सीएचसी की क्षमता के अनुरूप योजनाबद्ध ढंग से लागू करने, चिकित्सीय संसाधनों को अपडेट रखने और ऑब्जर्वेशन प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश बैठक में दिया गया।

समीक्षा बैठक में सिविल सर्जन डॉ साहिर पाल, एसीएमओ डॉ जोगेश्वर प्रसाद, डॉ रंजीत पांडा, डॉ ए मित्रा, डॉ मृत्युंजय धावड़िया के अलावा सभी एमओआईसी, डीपीसी, डीपीएम, डीडीएम, बीएएम, बीपीएम, बीडीएम और स्वास्थ्य विभाग के अन्य पदाधिकारी-कर्मी उपस्थित थे।