सिरसा: सीडीएलयू में युवा महोत्सव: मंच पर झलका संस्कृति और सृजन का संगम

युवा कल्याण निदेशक डॉ. मंजू नेहरा ने बताया कि इस वर्ष महोत्सव में चार विभिन्न मंचों पर अनेक सांस्कृतिक, साहित्यिक और तकनीकी प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं, जिनका मूल्यांकन विभिन्न राज्यों से आए विशेषज्ञ निर्णायक कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. विजय कुमार के दिशा निर्देशन में आयोजित हो रहा यह महोत्सव युवाओं की भूमिका को चैनेलाइज करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है।

शिक्षाविद् महावीर गुड्डॅू ने कहा कि डिजिटल मीडिया के इस युग में भी परंपरागत लोक माध्यमों की प्रासंगिकता और प्रभाव आज भी कायम हैं। उन्होंने कहा कि जहां आधुनिक तकनीक लोगों को जोडऩे का माध्यम बनी है, वहीं लोक माध्यमों ने समाज की जड़ों और संस्कृति को संजोकर रखा है। उन्होंने कहा कि युवा ही राष्ट्र की असली शक्ति हैं और उन्हें चाहिए कि वे अपनी ऊर्जा, रचनात्मकता और सोच को समाज के सकारात्मक परिवर्तन में लगाएं। गुड्डू ने बालिकाओं की शिक्षा और सशक्तिकरण पर विशेष बल देते हुए कहा कि किसी भी समाज का विकास तभी संभव है जब उसकी बेटियाँ शिक्षित, आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी हों। विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे बालिकाओं को समान अवसर प्रदान करें और उन्हें नेतृत्व के मंच तक पहुँचने के लिए प्रेरित करें।

इस अवसर पर प्रसिद्ध कलाकार जनार्दन शर्मा ने कहा कि युवा पीढ़ी को अपने जीवन में अनुशासन, आत्मविश्वास और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। जीवन की चुनौतियों से भयभीत होने की बजाय उन्हें अवसरों के रूप में देखना चाहिए। जिस व्यक्ति को स्वयं पर विश्वास होता है, वह जीवन में किसी भी मुकाम को हासिल कर सकता है। अपने लक्ष्यों की स्पष्ट टाइमलाइन बनाकर और निरंतर प्रयास करते हुए सफलता निश्चित रूप से प्राप्त होती है। गुड्डू ने विश्वविद्यालय प्रशासन और आयोजन टीम की सराहना करते हुए कहा कि विकसित भारत अभियान की भावना के अनुरूप यह महोत्सव विद्यार्थियों की छिपी प्रतिभाओं को उजागर करने और उन्हें सशक्त मंच प्रदान करने का उत्कृष्ट उदाहरण है।