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टीबी रोग के लिए अजमेर जिले के 206 गांव हाई रिस्क जोन वाले

अजमेर, 24 अप्रेल। केंद्रीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्रालय ने अजमेर जिले के 206 गांव को टीबी रोग के लिए हाई रिस्क जोन घोषित किया है। मंत्रालय ने देश भर के जिलों का अध्ययन कर हाई रिस्क जोन घोषित किए है। अब देशभर में हाई रिस्क जोन वाले जिलों में सौ दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान चलाया जा रहा है।

अजमेर की मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. ज्योत्सना रंगा ने बताया कि सरकार के निर्देशों के अंतर्गत अजमेर जिले में भी गत 24 मार्च टीबी मुक्त अभियान शुरू कर दिया गया है। 206 हाई रिस्क वाले गांवों में तो जांच का सघन अभियान चलाया ही जा रहा है, साथ ही जिले भर में लोगों की जांच कर टीबी रोग का पता लगाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इसके लिए केंद्र सरकार से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक वाली मशीन मिली है। सबसे पहले इन मशीनों से जांच कर टीबी के लक्षणों का पता लगाया जाता है, यदि मशीन की जांच में रिपोर्ट नेगेटिव आती है तो फिर संबंधित व्यक्ति के बलगम का नमूना लेकर जांच की जाती है। व्यक्ति को टीबी रोगी पाया जाता है तो फिर उसका इलाज सरकारी अस्पताल में निशुल्क किया जाता है। डॉ. रंगा ने कहा कि यूं तो जिले भर में कैंप लगाए जा रहे हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के लोग निकटतम स्वास्थ्य केंद्र में जाकर टीबी रोग की जांच करवा सकते हैं। उन्होंने कहा कि टीबी रोग जानलेवा है, लेकिन यदि समय पर इलाज शुरू कर दिया जाए तो व्यक्ति को कोई परेशानी नहीं होती। कई बार रोग हो जाने के बाद भी रोगी टीबी का इलाज नहीं करवाता। कई मामलों में व्यक्ति को रोग का पता ही नहीं चलता है। डॉ. रंगा ने स्वास्थ्य व्यक्तियों से भी आग्रह किया है कि वे टीबी रोग की जांच जरूर करवाए। जो लोग समूह के रूप में रहते हैं, उन्हें तो इस रोग की जांच अवश्य करवानी चाहिए। औद्योगिक इकाइयों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए जांच करवाना अनिवार्य है। सरकार ने 24 मार्च से सौ दिन का विशेष अभियान इसलिए चलाया है कि ताकि टीबी के रोगियों का पता लगाया जा सकता है। डॉ. रंगा ने सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों से भी आग्रह किया है कि वे विभाग के कैंप लगाने में सहयोग करे।