पशु परिचर भर्ती में 6433 पदों के लिए 4 लाख की मेरिट, जानिए क्यों!
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड ने पशु परिचर भर्ती परीक्षा के परिणाम की घोषणा कर दी है, लेकिन इसके साथ ही एक बड़ा विवाद शुरू हो गया है। बोर्ड ने 6433 स्वीकृत पदों के मुकाबले लगभग 4 लाख अभ्यर्थियों की मेरिट सूची जारी की है, जिससे चयन प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। परीक्षा को 6 अलग-अलग पारियों में आयोजित किया गया था, जिसमें से अभ्यर्थियों ने कुछ पारियों में पेपर को अत्यधिक सरल और कुछ में कठिन पाया। इससे यह भी आरोप लगा है कि छठी पारी में सबसे अधिक चयनित उम्मीदवारों की संख्या रही।
इस विवाद पर राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के चेयरमैन मेजर आलोक राज ने अभ्यर्थियों की शंकाओं के जवाब दिए। उन्होंने बताया कि एक ही परीक्षा में सभी पारियों के पेपर को समान रूप से बनाना संभव नहीं होता है, जिसके कारण कुछ प्रश्न पत्र सरल होते हैं और कुछ कठिन। इस असमानता को दूर करने के लिए बोर्ड नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूले का उपयोग करता है, जिसका उद्देश्य सभी पेपर के मार्क्स को समान स्तर पर लाना है। इस प्रक्रिया का उपयोग पहले भी विभिन्न परीक्षाओं में किया गया है, और बोर्ड ने इसे न्याय संगत मानते हुए ही लागू किया है।
नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया में सभी पारियों के अंकों की जाँच की जाती है और आंकड़ों के आधार पर उन्हें समायोजित किया जाता है। इस प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों में अंसतोष है कि कुछ पारियों के छात्रों को फायद हुआ है, जबकि अन्य को नुकसान। मेजर आलोक ने स्वीकार किया कि ये चिंताएँ कुछ हद तक सही हैं, लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रणाली में पूर्व में कई परीक्षाओं में संतुलन बनाने के लिए यह प्रक्रिया अपनाई जाती रही है।
जब अभ्यर्थियों ने प्रमुख रूप से भर्ती के पदों और मेरिट सूची में अधिकतम संख्या को लेकर सवाल उठाया, तो बोर्ड के चेयरमैन ने बताया कि इससे पहले भी पदों से अधिक छात्रों को पास किया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता के उद्देश्य से 2024 से सभी क्वालिफाइड अभ्यर्थियों की मेरिट सूची को सार्वजनिक किया जाएगा। यह सुनिश्चित करने के लिए कि सभी अभ्यर्थियों को उनकी वास्तविक स्थिति का पता चले और वे आगे की तैयारी में अच्छे निर्णय ले सकें।
सभी प्रश्न पत्रों में अनेक सवालों के दोहराव के बारे में पूछे जाने पर, मेजर आलोक ने बताया कि एक ही परीक्षा के लिए अलग-अलग पेपर बनाने के कारण कभी-कभी ऐसी स्थिति पैदा होती है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस परीक्षा में पूरी पारदर्शिता बरती गई थी, और उन्होंने इस बार विशेष रूप से रेंडम चयन की प्रक्रिया अपनाई थी ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता से बचा जा सके।
इस तरह, राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की इस पशु परिचर भर्ती परीक्षा से जुड़ी जटिलताओं और शंकाओं को स्पष्ट करने की कोशिश की गई है, लेकिन अभ्यर्थियों के मन में उठ रहे सवालों का समाधान आसान नहीं दिखता। बोर्ड के चेयरमैन ने सभी प्रश्नों के उत्तर देकर संदेह को कुछ हद तक दूर करने का प्रयास किया है, लेकिन आगे की कार्रवाई और व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता बनी हुई है।









