बिक रही नकली डिग्रियां: 30 हजार में पाएं पीएचडी, दलालों का झांसा 20 साल का अनुभव!
एमजीएस यूनिवर्सिटी, बीकानेर ने अपने 21 वर्षीय इतिहास में पहली बार प्रतिष्ठित मूर्तिकार अरूण योगीराज को मानद डॉक्टरेट (ऑनरेरी पीएचडी) की डिग्री प्रदान की है। यह विश्वविद्यालय की उपलब्धि है, लेकिन इसके साथ ही हाल ही में सोशल मीडिया पर मानद पीएचडी देने के नाम पर धोखाधड़ी के कई मामले भी सामने आए हैं। इसमें कुछ आशंकित लोग कम पढ़े-लिखे व्यक्तियों को झांसे में लेकर 30 हजार से 1.60 लाख रुपए तक का लालच दे रहे हैं। ये सक्रिय दलाल यह दावा कर रहे हैं कि वे यूजीसी द्वारा मान्यता प्राप्त विदेशी विश्वविद्यालय से मानद डिग्री दिला सकते हैं।
दैनिक भास्कर द्वारा किए गए एक अध्ययन में पता चला है कि इन दलालों ने सोशल मीडिया के माध्यम से ऑनरेरी पीएचडी से संबंधित कई ऑफर्स भेजे हैं। इन्होंने कॉल करके यह लुभावना प्रस्ताव दिया कि वे मानद डॉक्टरेट की डिग्री 15 दिन से लेकर 3 महीने की अवधि में प्रदान कर सकते हैं। एक दलाल ने यह भी कहा कि अगर कोई व्यक्ति उनकी ऑनरेरी डिग्री लेकर “डॉक्टर” की उपाधि प्राप्त करता है, तो उसे कानूनी मदद भी मिलेगी। दलालों का कहना है कि यदि आप पैसे जमा कराते हैं, तो डिग्री कोरियर द्वारा घर भेज दी जाएगी।
एक संवाददाता ने इन दलालों से बातचीत की, जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि केवल कुछ अनुभव होना पर्याप्त है और पाठशाला की पढ़ाई का कोई महत्व नहीं है। ऐसे में, 10वीं पास व्यक्ति भी आकर्षक डिग्री प्राप्त करने के लिए आवेदन कर सकता है। जो लोग कुछ सामाजिक कार्यों में योगदान देते हैं, उनके लिए पढ़ाई का महत्व कम बताया जा रहा है। दलालों ने फोन पर कहा कि शैक्षणिक क्षेत्र से तीन से चार प्रमुख व्यक्ति और सेलिब्रिटी इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि होंगे।
यूजीसी की मान्यता प्राप्त और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खड़ी विश्वविद्यालयों की सूची में दलालों द्वारा बताए गए विश्वविद्यालयों का नाम नहीं पाया गया है। इससे सिद्ध होता है कि ये संस्थाएं फर्जी हैं। यूजीसी की वेबसाइट पर 1197 विश्वविद्यालयों की सूची है, जिसमें विभिन्न प्रकार की विश्वविद्यालयें शामिल हैं, लेकिन इनमें से कोई भी यूरोप की उल्लेखित विश्वविद्यालय शामिल नहीं है।
विशेषज्ञ प्रो. भागीरथ सिंह बिजारणिया ने कहा कि मानद पीएचडी की डिग्री किसी व्यक्ति को तब दी जाती है, जब वह किसी क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर चुका हो। यह प्रक्रिया उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों और विश्वविद्यालय के विभिन्न सदस्यों की कमेटी द्वारा तय की जाती है, और कुलाधिपति की स्वीकृति आवश्यक होती है। ऐसे में, यह स्पष्ट है कि केवल पैसे देकर किसी को डिग्री दे देना एक धोखा है। हालांकि, आजकल प्रतिष्ठान की तलाश में कई लोग इस झांसे में आ जाते हैं। इसलिए सावधानी बरतना बेहद ज़रूरी है, ताकि ऐसे घटिया प्रथाओं का सामना न करना पड़े।









