कैसे छिपा है प्रेमानंद महाराज का ’21 साल का रहस्य’! जानिए गुरु का खुलासा
हाल ही में वृंदावन के राधावल्लभ मंदिर के तिलकायत अधिकारी श्रीहित मोहित मराल महाराज ने प्रेमानंद महाराज के संबंध में कुछ महत्वपूर्ण बातें साझा की हैं। उन्होंने बताया कि प्रेमानंद पहले शिव भक्ति में लीन थे, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने राधारानी की भक्ति का मार्ग अपनाया। मोहित मराल महाराज ने प्रेमानंद के अध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत और उनकी भक्ति में बदलाव के बारे में विस्तार से बताया।
प्रेमानंद महाराज की मुलाकात श्रीहित मोहित मराल महाराज से 21 वर्ष पूर्व हुई थी। उस समय, प्रेमानंद ने राधावल्लभ लाल के दर्शन करने के लिए मंदिर में कदम रखा। उन्होंने महाराज के चरणों में श्रद्धा के साथ अपने सवाल रखे, जिसके बाद मोहित महाराज ने उन्हें सही मार्ग दिखाया और अध्यात्म की दीक्षा दी। इस दीक्षा के बाद से प्रेमानंद महाराज ने खुद को पूरी तरह से भक्ति में लीन कर लिया और अब उनके भक्त उन्हें एक संत के रूप में नहीं, बल्कि एक प्रेरक वक्ता के रूप में मानते हैं।
मोहित मराल महाराज ने बताया कि प्रेमानंद महाराज की दीक्षा का दिन हर वर्ष उनके जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को नवसंवत्सर के पहले दिन के रूप में याद किया जाता है। प्रेमानंद की भक्ति न केवल शिष्यत्व का एक उदाहरण प्रस्तुत करती है, बल्कि यह यह भी दर्शाती है कि एक व्यक्ति कैसे किसी अलौकिक शक्ति की ओर आकर्षित हो सकता है।
प्रेमानंद महाराज का जीवन भी कई बदलावों से गुजरा है। कई लोग यह कहते हैं कि उनमें अहंकार की भावना विकसित हो गई है, लेकिन मोहित महाराज का कहना है कि यह संसार का नियम है। संत प्रेमानंद को लेकर लोगों की अलग-अलग राय होती है, कुछ लोग उनकी प्रशंसा करते हैं तो कुछ लोग आलोचना भी करते हैं। ऐसे में प्रेमानंद महाराज अपने कर्मों पर ध्यान देते हैं और अपनी भक्ति को बनाए रखते हैं।
मोहित महाराज ने प्रेमानंद के भक्ति मार्ग के पीछे का कारण भी स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति की जीवन यात्रा अलग होती है। जब शंकरजी की निकटता हो जाती है, तब भक्त को राधावल्लभ लाल की ओर भेजा जाता है। इस प्रक्रिया में प्रेमानंद का संतों के साथ जुड़ना और उनके साथ बिताए गए क्षण उनकी भक्ति का आधार बने।
अंत में, मोहित महाराज ने बताया कि श्री प्रेमानंद के सादगी से भरी बातें कई बार उनके लग्जरी गाड़ियों में यात्रा करने के कारण विवादों का शिकार भी हो जाती हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि भक्त द्वारा दिए गए उपहारों का सही उपयोग करना गुरु का कर्तव्य होता है। यह बातचीत हमें यह सिखाती है कि भक्ति का मार्ग सरल जरूर है, लेकिन इसे जीना और समझना थोड़ा कठिन हो सकता है।
इस प्रकार, प्रेमानंद महाराज की यात्रा भक्ति, प्रेरणा और संघर्षों से भरी है, जो सभी को प्रेरित करती है कि कैसे सच्ची भक्ति की ओर बढ़ा जाए।









