हेमा ने सेलिब्रिटी डीपफेक पर सवाल उठाया: फेमस हस्तियों के नाम का दुरुपयोग गंभीर मुद्दा!
लोकसभा में मशहूर हस्तियों को निशाना बनाते हुए डीपफेक टेक्नोलॉजी का मुद्दा उठाना अभिनेत्री और भाजपा सांसद हेमा मालिनी के लिए महत्वपूर्ण था। 27 मार्च को उन्होंने शून्यकाल के दौरान इस तकनीक के दुष्प्रभावों पर चर्चा की। उनका कहना था कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) एवं डीपफेक ने समाज में एक नई चुनौती पेश कर दी है। इसके फायदों के बावजूद, यह तकनीक फिल्म उद्योग की मशहूर हस्तियों, जो अपने नाम और पहचान के लिए कड़ी मेहनत करती हैं, को बड़े पैमाने पर प्रभावित कर रही है। उन्होंने इस बात की ओर ध्यान दिलाया कि कई लोग इस तकनीक के दुरुपयोग का शिकार हो चुके हैं, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
हेमा मालिनी ने कहा कि डीपफेक वीडियो का वायरल होना कई बार संबंधित व्यक्ति की मानसिक स्थिति पर गहरा असर डाल सकता है। जब ऐसी सामग्री सोशल मीडिया पर फैलती है, तो वह न सिर्फ व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि उनकी मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करती है। इससे पहले भी Celebrities की निजी जिंदगी पर सोशल मीडिया पर हो रही ट्रोलिंग का मुद्दा उठाया गया है। उन्होंने कहा कि सेलेब्स की बातें अक्सर अपने संदर्भ से अलग करके पेश की जाती हैं, जिसे समाज में गलत तरीके से स्वीकार किया जाता है।
हिंदी सिनेमा की दुनिया में कई नामचीन कलाकार ऐसे हैं जो डीपफेक का शिकार हो चुके हैं। हाल ही में, रश्मिका मंदाना का एक डीपफेक वीडियो सामुदायिक मंच पर चलन में आया, जिसमें किसी अन्य इन्फ्लुएंसर ने उनके चेरे का इस्तेमाल कर एक नया वीडियो बनाया। इसके बाद काजोल का भी एक वीडियो सामने आया, जो एक डीपफेक दस्तावेज था। आलिया भट्ट भी इस खतरे से बच नहीं पाई हैं, जिनके साथ दो बार ऐसा हो चुका है। इस प्रकार के घटनाक्रमों ने दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि उनकी पसंदीदा हस्तियों की छवि और विश्वसनीयता को बुरी तरह प्रभावित किया जा रहा है।
डीपफेक तकनीक वास्तव में क्या है? इसका पहला प्रयोग 2017 में अमेरिका के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Reddit पर किया गया था, जब कई सेलिब्रिटीज के वीडियो को इस तकनीक द्वारा संकलित किया गया। डीपफेक का अर्थ है, किसी वास्तविक वीडियो, फोटो या ऑडियो में दूसरे व्यक्ति के चेहरे, आवाज और भावनाओं को जोड़ना। यह प्रक्रिया इतनी सटीक होती है कि कोई भी इसे असली समझ सकता है। इसमें मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग किया जाता है।
आजकल ऐसे टूल्स मार्केट में उपलब्ध हैं, जिन्हें हर कोई आसानी से इस्तेमाल कर सकता है। एआई और साइबर एक्सपर्ट पुनीत पांडे के अनुसार, वर्तमान तकनीक में आवाज और वीडियो सामग्री को इतना संवर्धन किया जा चुका है कि अब यह वॉयस क्लोनिंग तक पहुंच चुका है, जो कि बहुत ही गंभीर समस्या है। इस प्रकार की तकनीक को देखने से यह स्पष्ट होता है कि डिजिटल दुनिया में सुरक्षा और प्राइवेसी बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह किसी भी समय किसी की छवि को नष्ट कर सकती है।









