हरियाणा: संतों पर फायरिंग का रहस्य? बासी खिचड़ी विवाद में बाउंसरों का हमला!

हरियाणा के कुरुक्षेत्र में बीते शनिवार को महायज्ञ के दौरान एक अप्रत्याशित और गंभीर घटना घटी, जब आयोजकों के निजी सुरक्षाकर्मियों ने संतों पर फायरिंग कर दी। इस हमले में घायल हुए संत आशीष तिवारी को गोली लगी, जबकि दूसरे संत प्रिंस शुक्ला भी चोटिल हो गए। इस पर गुस्साए संतों ने सड़कों पर उतरकर जाम लगा दिया और महायज्ञ के बैनरस और होर्डिंग्स को तोड़ना शुरू कर दिया। घटना ने इतनी गंभीरता ग्रहण कर ली कि पुलिस को भी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। बताया जा रहा है कि संतों ने आयोजकों पर बासी खाना परोसने का आरोप लगाया था, जिस वजह से यह विवाद बढ़ा।

महायज्ञ की शुरुआत 18 मार्च को हुई थी और इस दौरान 1008 संतों को आमंत्रित किया गया था। संतों को खिचड़ी परोसी गई, जिसे उन्होंने बासी बताकर मज़ाक उड़ाया। 20 मार्च को जब संतों ने भोजन की गुणवत्ता पर आपत्ति जताई, तो आयोजकों ने उन्हें आवश्यकता अनुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया। लेकिन शनिवार, 22 मार्च को संतों ने फिर से बासी खिचड़ी पर ऐतराज जताया और आयोजकों से शिकायत की। इस बीच, कुछ सुरक्षाकर्मियों और संतों के बीच बहस बढ़ गई, जिसने हालात को और बिगाड़ दिया।

आरोप के अनुसार, जैसे ही संतों ने बाउंसरों के खिलाफ आवाज उठाई, सुरक्षा कर्मियों ने हिंसा शुरू कर दी। मध्य प्रदेश के दमोह से आए संत प्रशांत अवस्थी ने बताया कि जब संत शिकायत लेकर जाने लगे, तो बाउंसरों ने उन पर हमला कर दिया। खुद की सुरक्षा के लिए संतों ने काउंटर किया, लेकिन तब तक बाउंसरों ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें संत आशीष तिवारी घायल हो गए। इसके बाद संतों का गुस्सा भड़क उठा और उन्होंने सड़कों पर धावा बोलकर तोड़फोड़ की।

घटना के बाद संतों ने सड़क को जाम कर दिया और आयोजकों के खिलाफ अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखा। सूचना पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर विकृत स्थिति को काबू में किया और दोनों घायलों को अस्पताल पहुंचाया। पुलिस ने आम जनता की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए FIR दर्ज की है, जिसमें आर्म्स एक्ट और हत्या की कोशिश की धाराएँ लगाई गई हैं। फिलहाल, संतों के बयान के आधार पर जांच जारी है और CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं।

इस घटना के बाद समाज के कई सदस्यों ने संतों की मदद का आश्वासन दिया है। पूर्व राज्यमंत्री सुभाष सुधा ने भी घायलों की भलाई के लिए अपने खर्च पर चिकित्सा का दावा किया है। इस अद्भुत घटना ने महायज्ञ को एक विवादित मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है, और अब सभी की नजरें पुलिस और आयोजकों पर हैं कि वे इस विवाद को कैसे सुलझाते हैं।