सुशांत केस में हत्या के प्रमाण नहीं: वकील का आरोप- बनाई गई झूठी कहानियां!

सुशांत सिंह राजपूत के मृत्यु मामले में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने अपनी अंतिम क्लोजर रिपोर्ट पेश की है, जो कि चार साल, छह महीने, और 15 दिन बाद आई है। इस रिपोर्ट में CBI ने स्पष्ट किया है कि सुशांत को आत्महत्या के लिए उकसाने का कोई भी ठोस प्रमाण नहीं मिला है। सुशांत का निधन 14 जून 2020 को बांद्रा स्थित अपने आवास पर हुआ था, जिसे रहस्यमय तरीके से समझा गया। इस मामले में मीडिया और विपक्षी दलों के लगातार दबाव के कारण जांच को CBI को सौंपा गया था। अब CBI की रिपोर्ट के अनुसार, सुशांत की موت का कारण आत्महत्या ही बताया गया है।

इस पूरे मामले में रिया चक्रवर्ती पर भी आरोप लगे थे, जिसके चलते उन्हें 27 दिन तक जेल में रहना पड़ा था। CBI की इस अंतिम रिपोर्ट के सामने आने के बाद, रिया के वकील सतीश मानेशिंदे ने एक बयान जारी किया जिसमें उन्होंने कहा कि इस मामले में अनेक झूठी कहानियाँ फैलाई गईं। उन्होंने यह भी जोर दिया कि रिया और उनका परिवार इस पूरे कष्ट को चुपचाप सहन करते रहे। रिपोर्ट में कहा गया है कि CBI ने दो मामलों की गंभीरता से जांच की।

सुशांत की संदिग्ध मौत के कुछ दिन पहले, उनकी मैनेजर दिशा सालियान की भी मृत्यु हुई थी, जो 8 जून 2020 को मुंबई की एक बिल्डिंग की 14वीं मंजिल से गिरने के कारण हुई। दिशा की मृत्यु भी रहस्यमय मानी गई थी। दिशा के पिता, सतीश सालियान ने आरोप लगाया था कि उनकी बेटी की हत्या गैंगरेप के बाद की गई थी। लेकिन राजनीतिक दबाव के कारण इस मामले को दबा दिया गया। प्रारंभ में, दिशा के पिता को पुलिस जांच पर भरोसा था, किंतु बाद में उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि मामला केवल एक ‘कवर-अप’ था।

इसके बाद, सतीश सालियान ने 20 मार्च 2025 को बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उन्होंने मांग की कि दिशा की मौत की नए सिरे से जांच की जाए और शिवसेना (UBT) के नेता आदित्य ठाकरे के खिलाफ FIR दर्ज की जाए। इस मामले को CBI को सौंपने की भी अपील की गई।

इस संदर्भ में एक महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया बीजेपी सांसद नारायण राणे की है, जिन्होंने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उद्धव ठाकरे पर आरोप लगाया। राणे ने कहा कि जब उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने उनसे अनुरोध किया था कि दिशा सालियान केस में उनके बेटे आदित्य ठाकरे का नाम न लिया जाए। राणे ने यह भी कहा कि दिशा के पिता को न्याय नहीं मिलने के कारण उन्हें हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। उन्होंने अदालती निर्णय के आधार पर आदित्य ठाकरे की गिरफ्तारी की मांग की है।

इस पूरे मामले ने न केवल बॉलीवुड के अंदरूनी मामलों को उजागर किया है, बल्कि राजनीतिक सरगर्मियों को भी जन्म दिया है। अगले दिनों में इस मामले की राजनीतिक और न्यायिक स्थिति पर लोगों की नजरें बनी रहेंगी।