आज श्री अकाल तख्त पर पहुंची भर्ती कमेटी, अकाली दल की सदस्यता ड्राइव का आगाज!

शिरोमणि अकाली दल द्वारा प्रस्तावित मैंबरशिप ड्राइव को लेकर खासी हलचल मची हुई है। इस ड्राइव को शुरू करने के लिए श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा एक समिति आज अमृतसर पहुंच रही है। समिति का पहला कदम होगा गोल्डन टेम्पल में जाकर अरदास करना, जिसके बाद वे आधिकारिक रूप से मैंबरशिप ड्राइव का आरंभ करेंगे। हालांकि, अकाली दल की वर्किंग कमेटी ने इस ड्राइव के शुरू होने पर कड़ी आपत्ति जताई है और समिति के गठन पर सवाल उठाए हैं।

डॉ. दलजीत सिंह चीमा, जो अकाली दल के प्रवक्ता हैं, ने भर्ती समिति के दो सदस्यों, हरजिंदर सिंह धामी और प्रो. कृपाल सिंह, के इस्तीफे का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि ये सदस्य दिल्ली से संचालित हो रहे हैं और इस तरह से काम नहीं कर रहे हैं, जैसा कि उन्हें करना चाहिए। डॉ. चीमा ने भर्ती फॉर्म में कई खामियों की指摘 की है। उनके अनुसार, फॉर्म पर शिरोमणि अकाली दल का नाम भी ठीक से नहीं लिखा गया है, और उन्होंने यह भी पूछा है कि यह पार्टी कब और कहां रजिस्टर हुई थी।

अकाली दल के प्रवक्ता ने कमीशन की प्रक्रियाओं पर भी सवाल उठाया है, जिसमें यह भी शामिल है कि फॉर्म में जानकारी जैसे पता और फोन नंबर तक उल्लेख नहीं किया गया है। यह चिंताजनक है, क्योंकि जो भी फंड इकट्ठा किया जाएगा, उसे किन्हीं प्राधिकृत ठिकानों पर जमा करवाया जाएगा, इसकी जानकारी भी स्पष्ट नहीं है। डॉ. चीमा ने कहा है कि यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए ताकि कार्यकर्ताओं में अविश्वास न बने।

इससे पहले, वर्किंग कमेटी ने पूर्व जत्थेदार के समक्ष भी चुनौतियों का हवाला दिया था, और यदि अकाली दल धर्म से प्रेरित होकर सदस्यता अभियान चलाता है तो वे संभावित रूप से विपक्षी दलों की मान्यता को चुनौती दे सकते हैं। इस संबंध में अकाल तख्त ने भी मसले को सुलझाने के लिए बातचीत की पेशकश की थी। विपरीत परिस्थितियों में, भर्ती मुहीम के लिए नियुक्त समिति के सदस्यों ने अपनी जिम्मेदारियों को ठीक से नहीं निभाया है, जिससे अकाली दल के भीतर असंतोष की लहर दौड़ गई है।

इस तरह की स्थिति में, हर किसी की नजरें अब इस समिति पर होंगी कि वो किस तरह से इस अभियान को आगे बढ़ाती है और साथ ही अकाली दल की वर्किंग कमेटी की चिंताओं का समाधान कैसे करती है। अब देखना यह होगा कि क्या ये नई समिति अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर पाएगी या फिर अकाली दल के अंदरूनी विवादों के कारण यह अभियान सफल हो पाएगा।