कपूरथला जेल में कैदी की संदिग्ध मौत: NDPS एक्ट में बंद, पत्नी ने खोला राज!
पंजाब के कपूरथला स्थित एक मॉडर्न जेल में एनडीपीएस एक्ट के एक आरोपी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। मृतक की पहचान जंडियाला गुरु के रहने वाले सरबजीत सिंह साबा के रूप में हुई है, जो पिछले एक साल से जेल में बंद था। अचानक उसकी तबीयत खराब हो जाने पर उसे कपूरथला के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल के शवगृह में रखवाया गया है।
सरबजीत की पत्नी पूजा ने मृतक के बारे में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि पुलिस ने उनके पति पर झूठा मामला दर्ज किया था। पूजा के अनुसार, पहले तो पुलिस ने उनके पति का हाथ तोड़ा, और फिर उसकी हत्या कर दी। उन्होंने यह भी बताया कि अपनी मृत्यु से पहले, सरबजीत ने उन्हें फोन पर बताया था कि उसे जेल में धमकियां मिल रही हैं। पूजा ने कहा कि उसने इस संबंध में कोतवाली पुलिस को भी सूचना दी थी, लेकिन कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई।
मृतक की मां, बेअंत कौर ने भी पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके बेटे को जानबूझकर सताया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस मामले में सच्चाई सामने आएगी और न्याय मिलेगी। कोतवाली थाने के एसएचओ कृपाल सिंह ने मामले की जानकारी मिलने की पुष्टि करते हुए कहा कि परिजनों के बयान के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी। इस घटना को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं, जैसे कि जेल में सरबजीत की सुरक्षा को लेकर कितनी सावधानी बरती गई थी?
इस मामले की जांच जरूरी है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जेल प्रशासन ने अपनी जिम्मेदारियों का सही तरीके से निर्वहन किया या नहीं। ऐसे मामलों में अक्सर जेल में बंद व्यक्तियों की सुरक्षा और उनके अधिकारों का उल्लंघन होता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। साथ ही, यह भी देखने की आवश्यकता है कि जेल में बंद व्यक्तियों को किस तरह की स्थिति का सामना करना पड़ता है, और क्या इस प्रकार की घटनाएं अन्य जेलों में भी हो रही हैं।
सरबजीत की मौत ने न केवल उसके परिवार को झकझोर दिया है, बल्कि समाज में भी सवाल उठाए हैं कि क्या कानून व्यवस्था लोगों की सुरक्षा को सुनिश्चित कर पाने में सक्षम है या नहीं। कई दोराहों पर पुलिस और जेल प्रशासन का दायित्व है कि वे दोषियों पर नियंत्रण रखें, ताकि ऐसी घटनाएं भविष्य में दोबारा न घटित हों। इस मामले की निष्पक्ष जांच और न्याय की आवश्यकता है ताकि परिवार को मानसिक और भावनात्मक संतोष मिल सके।









