उदयपुर में महाराणा प्रताप के वंशज अरविंद सिंह का अंतिम संस्कार, अंतिम दर्शन सुबह 7 बजे!
उदयपुर में मेवाड़ के पूर्व राज परिवार के प्रतिष्ठित सदस्य अरविंद सिंह मेवाड़ का निधन हाल ही में हुआ, जिसके चलते आज उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी। राजशाही की समृद्ध परंपरा के अनुसार, उनकी अंतिम यात्रा सुबह 11 बजे सिटी पैलेस के शंभू पैलेस से आरंभ होगी। यह यात्रा उदयपुर के विभिन्न प्रमुख स्थलों जैसे बड़ी पोल, जगदीश चौक, घंटाघर और बड़ा बाजार से होते हुए महासतिया में समाप्त होगी, जहां उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। अंतिम दर्शन के लिए उनकी पार्थिव देह सुबह 7 बजे से रखी जाएगी।
अरविंद सिंह मेवाड़, जो महाराणा प्रताप के वंशज थे, का निधन 16 मार्च को हुआ। वे पिछले कुछ समय से गंभीर बीमारी से ग्रसित थे और सिटी पैलेस के शंभू निवास में रहकर चिकित्सीय देखभाल प्राप्त कर रहे थे। उनके पिता भगवत सिंह मेवाड़ और माता सुशीला कुमारी मेवाड़ थे। उनके बड़े भाई महेन्द्र सिंह मेवाड़ का निधन पिछले वर्ष 10 नवंबर को हुआ था, जिससे परिवार में शोक का माहौल बना हुआ है।
अरविंद सिंह मेवाड़ की पहचान सिर्फ एक पूर्व राजपरिवार के सदस्य के रूप में नहीं थी, बल्कि उन्होंने उदयपुर को डेस्टिनेशन वेडिंग का प्रमुख केंद्र बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके बेटे लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने हाल ही में राजस्थान समिट के दौरान बताया कि उनके पिता ने 1980 के दशक में डेस्टिनेशन वेडिंग की अवधारणा को विकसित करने का काम शुरू किया था। उस समय इस विचार पर लोगों ने हंसी उड़ाई, लेकिन आज यह एक व्यापक ट्रेंड बन चुका है, न केवल राजस्थान में, बल्कि पूरे देश में।
उन्होंने यह भी कहा कि उदयपुर आज जिस मानक पर स्थापित है, उसमें उनके पिता की सोच और मेहनत का अहम योगदान है। लक्ष्यराज ने भावुक होते हुए कहा कि आज डेस्टिनेशन वेडिंग का चलन केवल एक उद्यम नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक परिवर्तन का प्रतीक बन चुका है। यह मेवाड़ परिवार के लिए गर्व का विषय है कि उनके पूर्वजों की सोच ने आज एक नई दिशा दी है।
अरविंद सिंह मेवाड़ के निधन का समाचार सुनकर न केवल उनके परिवार, बल्कि सभी उदयपुर वासियों में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके योगदान और दृष्टिकोण को हमेशा याद रखा जाएगा, और उनकी विरासत आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करेगी। उनके अद्वितीय योगदान को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि उन्होंने खुद को एक प्रेरणा स्रोत के रूप में स्थापित किया है। आज उनका अंतिम विदाई समारोह उनके परिजनों और प्रशंसकों के लिए एक यादगार क्षण होगा, जिसमें उदयपुर की राजकीय संस्कृति की अद्भुत झलक देखने को मिलेगी।









