संजय दत्त की रिहाई में मददगार शत्रुघ्न सिन्हा, अब भुला बैठे अभिनेता!

हाल ही में शत्रुघ्न सिन्हा ने एक इंटरव्यू के दौरान अपने करीबी दोस्त संजय दत्त के साथ के कुछ महत्वपूर्ण घटनाक्रम पर चर्चा की। उन्होंने खुलासा किया कि जब संजय दत्त 90 के दशक में जेल गए थे, तब उन्हें काफी चिंता हुई थी। शत्रुघ्न ने बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि संजय जल्दी ही जेल से बाहर आ जाएंगे। इस दौरान, शत्रुघ्न और राजेंद्र कुमार ने बालासाहेब ठाकरे की सहायता से संजय को जेल से बाहर निकलवाने का प्रयास किया। सिन्हा ने कहा कि अगर बालासाहेब ठाकरे उनकी मदद नहीं करते, तो शायद संजय दत्त जेल में लंबे समय तक बने रहते।

शत्रुघ्न ने बताया कि जेल में संजय की मुश्किलों के समय, उन्हें और उनके दोस्तों को इस बात की चिंता थी कि कैसे वे संजय की मदद कर सकते हैं। बालासाहेब ठाकरे ने इस कठिन समय में उनकी सहायता की, जिससे संजय दत्त को रिहाई मिली। सिन्हा ने कहा कि संजय जब जेल से बाहर आए, तब वे उनके घर मिलने भी आए थे। उस समय, उस समुदाय के सभी लोग, जो संजय की मदद कर रहे थे, एकत्रित हुए और उन्हें आशीर्वाद दिया। लेकिन इसके बाद धीरे-धीरे संजय शत्रुघ्न से दूर होते गए।

शत्रुघ्न ने यह भी कहा कि उन्होंने संपर्क स्थापित करने की कोशिश की, लेकिन संजय से बात नहीं हो पाई। उनके अनुसार, इसका मतलब यह नहीं है कि संजय उनके प्रति अनदेखा कर रहे हैं, बल्कि हो सकता है कि वह काम में व्यस्त रहें या यह बात उन तक ठीक से न पहुंची हो। शत्रुघ्न ने संजय को अच्छा व्यक्ति मानते हुए कहा कि ऐसे हालातों में यह आम बात है।

इस बीच, यह भी महत्वपूर्ण है कि शत्रुघ्न सिन्हा और संजय दत्त ने कई फिल्मों में एक साथ काम किया है, जैसे ‘इंसाफ अपने लहू से’ और ‘अधर्म’। इसके अलावा, शत्रुघ्न की बेटी सोनाक्षी सिन्हा के साथ संजय ने ‘सन ऑफ सरदार’ में भी काम किया था। यह संबंध दोनों के बीच की व्यक्तिगत और पेशेवर पहलुओं को उजागर करते हैं।

संजय दत्त के जेल जाने का कारण 1993 के मुंबई बम ब्लास्ट में अवैध हथियार रखने का आरोप था। इस मामले में उन्हें पुणे की यरवदा जेल में रखा गया, जहाँ उन्होंने लगभग पांच साल तक सजा काटी। लेकिन, क्योंकि संजय का व्यवहार अच्छा था, उन्हें जेल से आठ महीने पहले रिहा किया गया। इस तरह की घटनाएं उनकी जिंदगी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहीं, जिस पर शत्रुघ्न सिन्हा ने प्रकाश डाला है। उनके शब्दों में, यह एक कठिन समय था, लेकिन दोस्ती और समर्थन के जरिए उन्होंने संजय को उबारने का प्रयास किया।