संसद में हंगामा: कांग्रेस नेताओं पर पेपर बिकवाने का आरोप, जूली का विशेषाधिकार प्रस्ताव का अल्टीमेटम!
राजस्थान विधानसभा में शिक्षा विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा करते हुए शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने पूर्व कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार में कांग्रेस नेताओं ने पैसे लेकर परीक्षा पत्र बेचने का काम किया। इस कथन के साथ ही कांग्रेस विधायकों ने तीव्र विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, जो 15 मिनट तक जारी रहा। हंगामे के दौरान स्पीकर ने कहा कि किसी विशेष व्यक्ति का नाम नहीं लिया गया, लेकिन पार्टी पर लगातार आरोप लगते रहे। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कांग्रेसी विधायकों की ओर से मंत्री के आरोपों को चुनौती देते हुए कहा कि अगर मंत्री आरोप लगा रहे हैं तो उन्हें इसे साबित भी करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि ऐसे आरोप जारी रहे तो वह विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाएंगे और भाजपा पर भी जनता के धन को लूटने का आरोप लगाया।
इस हंगामे के बीच, दिलावर ने टिप्पणी की कि पिछली सरकार के समय मिड डे मील में 1705 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ था और मदरसा बोर्ड में ड्रेस खरीदने के लिए 5 करोड़ रुपये का भी घोटाला सामने आया है। उन्होंने यह भी चेताया कि दोषियों को किसी भी हाल में नहीं छोड़ा जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने आधार कार्ड मशीनों के घोटाले का भी जिक्र किया, जिससे कांग्रेस विधायकों ने शोर मचाना शुरू कर दिया।
जब हंगामा बढ़ गया, तो दिलावर ने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय में 590 आधार मशीनें खरीदी गईं, जिनमें से कुछ बांग्लादेश पहुंच गईं। उनके मुताबिक, ये मशीनें रोहिंग्या मुसलमानों को आधार कार्ड बनाने में मददगार बनीं, जो राजस्थान में अवैध रूप से घुसपैठ कर गए। मंत्री ने दावा किया कि कोरोना काल के दौरान जब लोग घरों में बंद थे, तब भी मिड डे मील में धांधली हुई। उन्होंने कहा कि 59 लाख बच्चों के लिए खाद्य सामग्री का आवंटन किया गया, जबकि 66 लाख को आपूर्ति दी गई।
स्पीकर ने सदन में व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी ली और कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने सदन के सदस्य का नाम लेकर गलत आरोप लगाया, तो उसे कार्यवाही से हटा दिया जाएगा। इस बयान के बाद हंगामा और बढ़ गया, और कांग्रेसी विधायकों ने नारेबाजी शुरू कर दी। मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने भी मंत्री के आरोपों को लेकर टिप्पणी की और कहा कि यह एक बहुत छोटा आरोप था, जबकि दिलावर ने इसकी स्वीकार्यता करते हुए कहा कि वह अपने शब्दों को वापस लेते हैं।
यह पूरे घटनाक्रम ने विधानसभा में राजनीतिक गर्मागर्मी को और बढ़ा दिया। विपक्षी दल ने इसे लोकतंत्र के खिलाफ एक तरह का हमला माना और आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल ऐसे बयानों के जरिए अपनी असलियत छिपाना चाहता है। इस प्रकार का आरोप-प्रत्यारोप विधानसभा में पहले भी देखने को मिल चुका है, लेकिन इस बार तो यह हंगामे के स्तर तक पहुंच गया।









