कर्ज के बोझ में दबे बरनाला के युवा किसान ने की आत्महत्या, परिवार सदमे में

पंजाब के बरनाला जिले में स्थित धौला गाँव में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसमें एक युवा किसान ने आर्थिक संकट के चलते आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान रुपिंदर सिंह के रूप में हुई है, जो अपने परिवार का एकलौता बेटा था। रुपिंदर ने साढ़े तीन एकड़ जमीन पर खेती की थी, लेकिन उसके परिवार पर 15 लाख रुपये का भयानक कर्ज था। कर्ज के बोझ तले दबे होने के कारण उसे अपने आधे एकड़ खेत को भी बेचना पड़ा, लेकिन फिर भी कर्ज का स्तर कम नहीं हुआ। इन समस्याओं के चलते रुपिंदर नशीली दवाओं की लत में फंस गया था, जिसके परिणामस्वरूप उसने अपनी जान दे दी।

बीती शाम की यह घटनाक्रम उस समय हुआ जब रुपिंदर अपने कमरे में अकेला था, जबकि उसकी मां घर के बाहर काम कर रही थीं। जब वह चाय का कप लेकर कमरे में गईं, तो देखा कि दरवाजा बंद है। आसपास के लोगों की मदद से जब दरवाजा तोड़ा गया, तो रुपिंदर पंखे से लटका हुआ पाया गया। उसके शव के पास नशीली गोलियां और सिरिंज भी मिले जो उसके नशे के आदी होने की पुष्टि करते हैं।

परिवार के मुताबिक, रुपिंदर के पिता बलदेव सिंह दिल के मरीज हैं और हाल ही में अस्पताल से लौटे हैं। उनके लिए यह घटना बेहद दुखद है, क्योंकि वह अपने इकलौते बेटे को खो चुके हैं। परिवार की माँ और बहन का रो-रोकर करना बुरा हाल है। मृतक के चाचा बलजिंदर सिंह ने बताया कि परिवार पर विभिन्न ऋणों का भार है, जिसमें सोसाइटी का निजी लोन भी शामिल है। इससे स्पष्ट होता है कि कर्ज के बोझ ने रुपिंदर को मानसिक तनाव में डाल दिया था।

इस घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। थाना रूड़ेके कबीले के एसएचओ गुरमेल सिंह ने कहा कि मृतक के परिजनों के बयान के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जा रही है। अब परिवार सरकार से यह अपील कर रहा है कि उनके 15 लाख रुपये के कर्ज को माफ किया जाए, ताकि वे अपने जीवन को सुचारू रूप से चला सकें और पीछे छूट गए बुजुर्ग माता-पिता का भरण-पोषण कर सकें।

यह घटना न केवल परिवार के लिए एक बड़ी त्रासदी है, बल्कि समाज को भी एक गंभीर संदेश देती है कि आर्थिक दबाव और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना कितना आवश्यक है। ऐसी घटनाएं हमें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि कब तक हम इस सामाजिक समस्या की अनदेखी करते रहेंगे और कब तक युवा पीढ़ी कर्ज और नशे की ओर अग्रसर होती रहेगी।