लखनऊ यूनिवर्सिटी: नशे में दोस्त की पिटाई, FIR न होने पर आत्महत्या की धमकी!
लखनऊ विश्वविद्यालय में एक एमबीए छात्र के साथ हुई मारपीट की घटना के बाद हालात काफी गम्भीर हो गए हैं। यह घटना शनिवार को घटित हुई, लेकिन इसका खुलासा सोमवार को हुआ। छात्र ने आरोप लगाया है कि उसने अपनी शिकायत पुलिस को दी थी, लेकिन FIR दर्ज नहीं की गई। इसके साथ ही उसने कुलपति, प्राक्टोरियल बोर्ड के सदस्य और हसनगंज थानाप्रभारी पर जिम्मेदारी का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी है कि यदि FIR दर्ज नहीं की गई, तो वह आत्महत्या कर लेगा। उसने स्पष्ट किया कि इस स्थिति की पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस पर होगी।
घटना के बारे में छात्र ने बताया कि शनिवार को एमबीए विभाग के तीन दिवसीय कार्यक्रम का समापन हुआ। इस दौरान दो छात्र, अनिरुद्ध त्रिपाठी और कुस्तुम मिश्रा, शराब के नशे में थे और उन्होंने बिना किसी वजह से एक-दूसरे से उलझना शुरू कर दिया। जब छात्र ने उन्हें रोकने की कोशिश की, तो उन दोनों ने उस पर हमला कर दिया, जिससे वह किसी तरह वहाँ से भागने में सफल हुआ। छात्र ने अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त कीं और इस सिलसिले में प्राक्टोरियल बोर्ड में लिखित शिकायत की। लेकिन अभी तक किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई है।
पुलिस ने छात्रों के खिलाफ FIR दर्ज करने के बजाय केवल NCR दर्ज की है, जिससे छात्र काफी निराश हैं। इस पर लखनऊ विश्वविद्यालय के चीफ प्राक्टर प्रोफेसर राकेश द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि यश की शिकायत को हसनगंज थाने में भेज दिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि पुलिस ने मामले की जांच का आश्वासन दिया है, लेकिन यह रविवार का दिन होने के कारण कार्रवाई में देरी हो रही है। प्रो. द्विवेदी ने कहा कि सोमवार को आरोपी छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा और जवाब प्राप्त होने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
छात्र ने विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी विफलता के कारण उसे गंभीर खतरा महसूस हो रहा है। उसने यह भी कहा कि यदि किसी तरह की उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो वह अपनी जान देने की बात सोच सकता है। यह स्थिति न केवल छात्र के लिए भयावह है, बल्कि विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाती है। ऐसे में यह देखना होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस यह मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और आरोपी छात्रों के खिलाफ उचित कार्रवाई करते हैं या नहीं।
इस विवाद ने एक बार फिर विश्वविद्यालयों में छात्र सुरक्षा और प्रशासन की जिम्मेदारी को लेकर चर्चा को जन्म दिया है। छात्रों का सुरक्षा में विश्वास होना आवश्यक है, और ऐसे मामलों में त्वरित और उचित कदम उठाना बेहद महत्वपूर्ण है।









