सरकारी इंजीनियर के लॉकर से करोड़ों का सोना-चांदी बरामद; दो और बैंक लॉकर खुलेंगे!

राजस्थान के जोधपुर में सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर दीपक कुमार मित्तल के खिलाफ आपराधिक जांच का मामला गहराता जा रहा है। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की कार्रवाई बुधवार को भी जारी रही। सोमवार को एसीबी के अधिकारियों ने जयपुर की सी-स्कीम क्षेत्र में स्थित एक बैंक के एक लॉकर से 1.25 किलो सोने के गहने और 5 किलो चांदी के जेवरात बरामद किए। इन सोने के गहनों की कुल कीमत लगभग 1.09 करोड़ रुपए आंकी जा रही है। मंगलवार को एसीबी की टीम गंगापुर सिटी में मित्तल के दो अन्य बैंक लॉकर खोलने की योजना बना रही है। कार्रवाई की शुरुआत शनिवार रात को हुई, जब एसीबी ने राजस्थान और हरियाणा के 6 शहरों में उनके ठिकानों पर सर्च अभियान शुरू किया था।

ACB के निदेशक जनरल रवि प्रकाश ने बताया कि इस छापेमारी में इंजीनियर के जयपुर स्थित घर से लगभग 50 लाख रुपए नकद, आधा किलो सोने के गहने और 1.5 किलो चांदी के आभूषण बरामद हुए। छापेमारी के दौरान दीपक मित्तल और उनके परिजनों के नाम पर जयपुर में 4 प्लॉट, उदयपुर में 9 प्लॉट, ब्यावर और अजमेर में कुल मिलाकर 6.50 लाख रुपए के 3 प्लॉट भी पाए गए। इसके अलावा, मित्तल के 18 बैंक खातों में लगभग 40 लाख रुपए प्रतीत हो रहे हैं, और तीन बैंक लॉकर भी पाए गए हैं। कार्यक्रम के दौरान, यह भी पता चला कि मित्तल ने म्यूचुअल फंड में लगभग 50 लाख रुपए का निवेश किया है और उनके पास 15 लाख रुपए की कीमत का एक वाहन भी है।

गौरतलब है कि एसीबी को इंजीनियर के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायत मिली थी, जिसके बाद कोर्ट से सर्च वारंट प्राप्त कर कार्रवाई की गई। दीपक मित्तल पर आरोप है कि उन्होंने अपनी आय से 4 करोड़ 2 लाख 14 हजार 395 रुपए की अधिक संपत्ति अर्जित की है। ACB ने मित्तल की संपত্তियों की जांच में बहुत सी चिंताजनक चीजें देखी हैं, जो उनकी नौकरी के शुरू होने के बाद से लगातार बढ़ रही हैं। मित्तल के ठिकानों पर जिस तरह से संपत्तियों का खुलासा हो रहा है, उससे यह साफ प्रतीत हो रहा है कि सार्वजनिक सेवकों के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता है।

इस पूरे मामले से यह संदेश भी जा रहा है कि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है। ACB की इस कार्रवाई से सरकारी कर्मचारियों में एक आशंका और जागरूकता का माहौल बन सकता है, जिससे भविष्य में ऐसी गतिविधियों की रोकथाम की जा सकेगी। मित्तल केस न केवल एक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई का मामला है, बल्कि समग्र रूप से सरकारी तंत्र में सुधार की दिशा में एक सकारात्मक कदम भी है।