जगराओं में उग्र प्रदर्शन: बॉयो गैस फैक्ट्री के खिलाफ गांववालों का सड़कों पर धरना!

लुधियाना के जगराओं स्थित गांव अखाड़ा में चल रही बायो गैस फैक्ट्री के खिलाफ स्थानीय निवासियों का आंदोलन एक बार फिर तेज हो गया है। सोमवार को किसान नेताओं के नेतृत्व में ग्रामीणों ने हाथों में झंडे लेकर सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया। गांव के नागरिकों ने हठूर रोड पर फैक्ट्री के गेट के सामने पहुँचकर धरना प्रदर्शन किया। इस मौके पर भारतीय किसान यूनियन एकता डकौदा के जिला अध्यक्ष जगतार सिंह देहडका ने धरना सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जिला पुलिस और प्रशासन द्वारा फैक्ट्री को चालू करने के प्रयासों को किसी भी हाल में सफल नहीं होने दिया जाएगा।

जगतार सिंह ने आगे बताया कि वैज्ञानिक आधार पर गठित समन्वय समिति द्वारा सरकार को प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों में यह स्पष्ट हो चुका है कि यह गैस फैक्ट्रियां कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों को बढ़ावा देती हैं और पर्यावरण एवं जनस्वास्थ्य के लिए खतरा बनती जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास इन समस्याओं का कोई ठोस जवाब नहीं है, और अब समय आ गया है कि सरकार इस मामले में न्यायालय में सही तथ्य पेश करे।

संगठन की प्रेस वार्ता में संघर्ष समिति के नेता एवं स्थानीय इकाई के अध्यक्ष गुरतेज सिंह ने पंजाब सरकार को चेतावनी दी कि यदि सरकार सही तथ्य सामने नहीं लाती है तो गांव के लोग हर दृष्टि से अपने हक के लिए लड़ाई जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ कुछ लोगों का मुद्दा नहीं है, अपितु पूरा गांव इस लड़ाई में एकजुट है। गांववासी हर तरह की कुर्बानी देने के लिए तैयार हैं, लेकिन किसी भी स्थिति में फैक्ट्री का निर्माण नहीं होने दिया जाएगा।

जिला सचिव इंद्रजीत सिंह धालीवाल ने बताया कि संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर 9 जनवरी को मोगा की दाना मंडी में आयोजित होने वाली किसान महापंचायत में ग्रामीणों की बड़ी संख्या में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए योजना बनाई जा रही है। धरने में कई प्रतिष्ठित ग्रामीण नेता भी उपस्थित रहे, जिनमें प्रो सरपंच जसवीर सिंह, सुखजीत सिंह, हरदेव सिंह, जगदेव सिंह सहित अन्य महिला नेता जैसे बलजीत कौर, नसीब कौर, और मंजीत कौर शामिल थे।

गांव के निवासियों का यह आश्वासन है कि वे अपनी आवाज को उठाते रहेंगे और गांव के विकास एवं स्वास्थ्य के हितों की रक्षा के लिए किसी भी प्रकार की लड़ाई लड़ेंगे। इस प्रकार का संगठित आंदोलन यह दर्शाता है कि ग्रामीण अपनी समस्याओं को लेकर कितने गंभीर हैं और अपनी आवाज को उठाने के लिए वे किसी भी सीमा तक जाने के लिए तत्पर हैं। अब यह देखना होगा कि सरकार इस समस्या का समाधान कैसे निकालती है और क्या उनके प्रयासों का कोई सकारात्मक परिणाम निकलेगा।