फाजिल्का में राइस मिल मालिकों का भूख हड़ताल: गोदाम में चावल ना लगने से बवाल!

फाजिल्का जिले के जलालाबाद में राइस मिल एसोसिएशन ने खाद्य निगम भारत (एफसीआई) के गोदामों के बड़े गेट के सामने धरना प्रदर्शन किया है। एसोसिएशन के सदस्यों का आरोप है कि जलालाबाद के स्थानीय राइस मिलरों के चावल की गाड़ियों को गोदामों में डंप नहीं किया जा रहा है, बल्कि दूसरी जिलों की गाड़ियों को प्राथमिकता दी जा रही है। इस अन्याय के खिलाफ उन्होंने यह आंदोलन चलाया है। जानकारी के अनुसार, गोदाम के प्रबंधक ने भी काम को बंद कर दिया है, जिससे स्थिति और भी गंभीर हो गई है।

राइस मिल एसोसिएशन के पदाधिकारी हरीश सेतिया ने बताया कि वर्तमान में उन्हें गोदामों में स्पेस की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि उनकी 2350 गाड़ियों में चावल रखा जाना है और अभी तक केवल 350 गाड़ियों को ही गोदामों में डंप किया गया है। संतोषजनक स्पेस की कमी के कारण लगभग 1900 गाड़ियां अब भी गोदाम में नहीं पहुँच पाई हैं। सेतिया का मानना है कि एफसीआई अधिकारी जानबूझकर जलालाबाद के मिलरों की गाड़ियों को अनदेखा कर रहे हैं और दूसरे जिलों की गाड़ियों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जो गरीब मिलरों के लिए आर्थिक संकट साबित हो रहा है।

शेलर मालिकों ने भी चिंता व्यक्त की है कि पूरे पंजाब में स्पेस की समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि उनकी चावल गोदाम में नहीं डंप की जाएगी और बाहर के चावल को तरजीह दी जाएगी, तो ऐसे में उनके लिए यह व्यवसाय संचालित करना मुश्किल हो जाएगा। उनकी शिकायत है कि उन्होंने इस मुद्दे पर अधिकारियों के साथ चर्चा की, लेकिन उनकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं है, जिससे उनकी आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

आंदोलन के कारण कई श्रमिक भी प्रभावित हो रहे हैं। शेलर मालिकों का कहना है कि कई मजदूर बेरोजगार हो गए हैं और उन्हें आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। इस मौके पर जलालाबाद के डिपो प्रबंधक अनिल वर्मा ने मीडिया से बात करते हुए स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि गोदामों में स्पेस की कमी है और जो भी स्पेस उपलब्ध है, उसी में सभी की गाड़ियों को लगाया जाएगा। अनिल वर्मा ने इस बात की पुष्टि की कि उन्हें उपरोक्त आदेश प्राप्त हुए हैं और इसी के अनुसार गाड़ियों को डंप किया जा रहा है।

इस धरने के चलते न केवल स्थान की समस्या उजागर हुई है, बल्कि स्थानीय राइस मिलर्स के व्यवसाय पर संकट भी खड़ा हो गया है। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे आगे भी अपने आंदोलन को जारी रखेंगे। यह स्थिति न सिर्फ जलालाबाद, बल्कि पूरे पंजाब में अनाज उद्योग के लिए चिंता का विषय बन सकती है।