पंजाब में किसानों का उबाल: नई कृषि नीति पर रद्द कानूनों की वापसी का शक!

केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत की गई नई कृषि विपणन नीति के मसौदे पर पंजाब के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह ने आज, 19 दिसंबर को पंजाब भवन में किसानों और कृषि विशेषज्ञों के साथ विस्तृत बैठक की। इस बैठक में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। किसानों ने स्पष्ट रूप से कहा कि केंद्र सरकार रद्द किए गए कृषि कानूनों को इस नई नीति के माध्यम से फिर से लागू करने की कोशिश कर रही है, जिसे वे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे। किसानों ने सरकार से आग्रह किया कि इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाकर विपक्षी दलों के सुझावों पर विचार किया जाए। इसके साथ ही विधानसभा सत्र में प्रस्तुत करके इन कानूनों को पूरी तरह रद्द करने की मांग भी की गई।

किसान नेता जोगिंदर सिंह उग्राहां ने मीडिया को बताया कि केंद्र द्वारा भेजे गए मसौदे में 2021 में वापस लिए गए कृषि कानूनों का रूप-रेखा एकदम वही है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने 25 नवंबर को यह ड्राफ्ट पंजाब सरकार को भेजा था और 10 दिसंबर तक इसका जवाब देने के लिए कहा गया था। इस संदर्भ में पंजाब सरकार ने तीन सप्ताह का समय मांगा है, क्योंकि किसानों का मानना है कि इस नीति के माध्यम से खाद्य सुरक्षा को कॉरपोरेट कंपनियों के हाथों सौंपने की कोशिश हो रही है, जो कि उन्हें ही नहीं, बल्कि श्रमिकों, आढ़तियों और ट्रांसपोर्टरों को भी प्रभावित करेगा।

किसान यूनियनों ने इस ड्राफ्ट को सिरे से नकारते हुए पंजाब सरकार से दोबारा सर्वदलीय बैठक बुलाने और मजदूर संगठनों के साथ चर्चा करने की अपील की है। किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने बताया कि किसानों ने इस नई कृषि विपणन नीति के ड्राफ्ट को विधानसभा सत्र में पेश करके रद्द करने की मांग की है। उनका कहना है कि केंद्र सरकार मंडियों पर निजी कब्जा करना चाहती है, जबकि कृषि विपणन नीति राज्य सरकार के अधीन है।

विशेषज्ञों का अनुमान है कि सरकार अब इस मसौदे पर किसानों की राय सुनने के बाद अद्यतन विधानसभा शीतकालीन सत्र में प्रस्ताव पेश करने की तैयारी कर रही है, जो जनवरी के दूसरे सप्ताह में हो सकता है। कृषि मंत्री ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से बैठक कर नीति की जानकारी साझा की और किसानों के साथ हुई बैठक का भी ब्योरा दिया। उन्होंने चेताया कि वर्तमान मंडी व्यवस्था समाप्त हो सकती है, जो कि राज्य की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है।

इस बीच, संयुक्त किसान मोर्चा ने पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मिलकर इस मसौदे के खिलाफ अपनी चिंता व्यक्त की है और मांग की है कि इस नीति को लागू नहीं किया जाए। किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि यह नीति निरस्त किए गए तीन कृषि कानूनों को पुनः लागू करने का प्रयास है। जोगिंदर सिंह उग्राहां ने स्पष्ट किया है कि इस नई नीति को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा और आगे चलकर संघर्ष की योजना बनाई जा रही है।