मोगा में किसानों की धुआंधार प्रदर्शन, जीटी रोड जाम, धान बोली न लगने पर हंगामा

पंजाब के किसानों, आढ़तियों और शेलर मालिकों ने रविवार को मोगा के जीटी रोड पर धान की खरीद और लिफ्टिंग में हो रही धीमी प्रक्रिया के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने सड़क को जाम करते हुए पंजाब सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी किसानों ने अपना विरोध दर्शाते हुए सड़क पर धरना भी दिया। उनका स्पष्ट आरोप है कि पंजाब सरकार ने 1 अक्टूबर से धान की खरीद प्रक्रिया आरंभ करने का वादा किया था, लेकिन अब 13 अक्टूबर को भी यह प्रक्रिया सुचारू रूप से नहीं चल रही है।

किसानों का कहना है कि मंडियों से उनकी फसल का उठाव नहीं किया जा रहा, जिसके कारण ना केवल उन्हें, बल्कि आढ़तियों को भी धान को इकट्ठा करने में बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति से चिंतित किसान और आढ़ती एकजुट होकर मांग कर रहे हैं कि सरकार तुरंत धान खरीदने की कार्रवाई तेज करे और इसे जल्दी से गोदामों तक पहुँचाने की व्यवस्था करे। उनके अनुसार, अगर ऐसा समय पर नहीं किया गया तो उन्हें भारी नुकसान का सामना करना पड़ेगा, जिससे आर्थिक स्थिति और खराब हो जाएगी।

कांग्रेस पार्टी की हलका प्रभारी मालविका सूद ने भी इस मुद्दे पर अपनी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति में पंजाब सरकार किसानों के प्रति उचित व्यवहार नहीं कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार उनके अधिकारों का उल्लंघन कर रही है और किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है। इस मुद्दे पर उनके द्वारा उठाए गए सवालों का समाधान ना निकलने तक, यह आंदोलन जारी रहेगा।

गौरतलब है कि पंजाब में धान की फसल का सीजन इन दिनों चल रहा है और इसे लेकर किसानों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति काफी संवेदनशील है। ऐसे में अगर सरकार की ओर से समय पर सहायता और उचित प्रक्रिया नहीं अपनाई गई, तो यह न केवल किसानों के लिए, बल्कि समूचे राज्य के कृषि क्षेत्र के लिए चुनौती बन सकती है। किसानों का यह प्रदर्शन इस तथ्य को उजागर करता है कि सरकार को कहीं न कहीं अपने कार्यों को सुधारने की आवश्यकता है।

इस आंदोलन से स्पष्ट है कि किसानों के मुद्दे अब और अधिक गंभीर हो गए हैं और किसानों की आवाज को अनसुना नहीं किया जा सकता। यदि जल्द ही कोई कार्रवाई नहीं की गई, तो यह मुद्दा और गंभीर रूप ले सकता है, जिससे राज्य में और भी बड़ी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। किसानों ने अपने हक के लिए अपनी आवाज उठाई है और अब उनकी उम्मीदें सरकार की सकारात्मक प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।