जगराओं एसडीएम ऑफिस में सेवादार से मारपीट: चाय की देरी और शराब सेवन का आरोप

जगराओं के एसडीएम ऑफिस में एक गंभीर घटना घटी है, जहां कर्मचारियों द्वारा एक सेवादार की बुरी तरह पिटाई कर दी गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, एसडीएम कार्यालय में शाम के समय कर्मचारी चुनावी कामों में व्यस्त थे। इसी दौरान तहसीलदार को चाय पीने की तलब हुई। जब सेवादार मौके पर नहीं था, तो कर्मचारियों का गुस्सा भड़क उठा। उन्होंने पहले सेवादार को फोन पर धमकाया और फिर उसे ऑफिस बुलाकर पीट डाला, जिसके कारण सेवादार को गंभीर चोटें आईं।

घटना के बाद, सेवादार अजय कुमार को अस्पताल में उपचार करवाना पड़ा और इसके बाद उसने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। अजय ने बताया कि वह एसडीएम ऑफिस में सेवादार के रूप में कार्यरत है। वह अपनी ड्यूटी समाप्त कर शाम को घर के लिए निकल गया था, लेकिन देर शाम उसे एसडीएम के रीडर ने फोन कर दफ्तर आने के लिए कहा। जब वह कार्यालय की ओर बढ़ा, तो उसे बताया गया कि तहसीलदार चाय मंगवा रहे हैं, जिसके लिए दूध लाना आवश्यक था। अजय ने अपने पास पैसे न होने की जानकारी दी, लेकिन इसके बावजूद रीडर ने उसके साथ बुरा बर्ताव किया।

जब अजय कार्यालय पहुंचा, तो उसने रीडर को बताया कि वह अभी दूध लेकर चाय बना देगा। लेकिन रीडर और अन्य क्लर्क ने उसकी बात को अनसुना करते हुए उसे एक कमरे में बंद कर दिया और उसकी पिटाई शुरू कर दी। जब अजय की पत्नी ने उससे मारपीट का कारण पूछा, तो कर्मचारियों ने अपशब्द कहे और जाति पर भी छींटाकशी की। इस अपमानजनक व्यवहार के खिलाफ अजय ने बस स्टैंड चौकी में शिकायत दर्ज करवाई है।

जांच के दौरान अजय कुमार ने बताया कि दफ्तर में कुछ कर्मचारी नियमित रूप से शराब पीते हैं, और जब वह उन्हें ऐसा करने से रोकता है, तो उसे धमकियां दी जाती हैं। यह पूरी घटना न केवल उसके व्यक्तिगत सम्मान पर चोट पहुंचाने वाली है, बल्कि यह दर्शाती है कि दफ्तरों में कार्य करने वाले सेवादारों और कर्मचारियों के बीच असमानता और हिंसा का स्तर कितना बढ़ रहा है।

इस मामले में पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी है और घटनाक्रम की जांच की जा रही है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अजय कुमार ने इंसाफ की मांग की है और उम्मीद जताई है कि न्याय मिलने से न केवल उसकी बल्कि अन्य कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। यह मामला संपूर्ण सरकारी दफ्तरों में कार्यकर्ता की सुरक्षा और मानवाधिकारों के उल्लंघन को लेकर एक महत्वपूर्ण विमर्श की आवश्यकता को उजागर करता है।