दिल्ली में एच1एन1 के 24 घंटों में 138 मामले, अस्पतालों को आइसोलेशन बेड और दवाएं सुनिश्चित करने के निर्देश
नई दिल्ली, 26 अगस्त । दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने बुधवार को दिल्ली सरकार के विभिन्न अस्पतालों के मेडिकल डायरेक्टर (एमडी) और मेडिकल सुपरिटेंडेंट (एमएस) के साथ एक वर्चुअल समीक्षा बैठक की। इस बैठक का मकसद एच1एन1, मौसमी इन्फ्लूएंजा और सांस से जुड़ी अन्य बीमारियों से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की गई। वर्चुअल बैठक में स्वास्थ्य सचिव, विशेष सचिव और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
इस बैठक में अस्पतालों की इमरजेंसी सेवाओं को और अधिक मजबूत करने और अस्पतालों में आइसोलेशन बेड, डॉक्टर, जांच की सुविधाएं, जरूरी दवाएं और अन्य अहम संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया। राजधानी दिल्ली में पिछले 24 घंटों में एच1एन1 के 138 मामले सामने आए हैं, जिससे वर्ष 2026 में दिल्ली में एच1एन1 मामलों की कुल संख्या 2446 हो गई। वहीं, दिल्ली में अब तक इन्फ्लूएंजा-ए के मामलों की कुल संख्या 3177 दर्ज किए गए हैं।
पंकज कुमार सिंह ने सभी अस्पतालों को निर्देश दिया गया कि वे कम से कम पांच आइसोलेशन बेड तैयार रखें, जबकि बड़े अस्पतालों में इन्फ्लूएंजा और वेक्टर-जनित बीमारियों के मामलों के प्रबंधन के लिए 10 या उससे ज़्यादा आइसोलेशन बेड सुनिश्चित करने को कहा गया है।
मंत्री ने अस्पतालों को यह भी निर्देश दिए हैं कि वे शिफ्ट के हिसाब से ड्यूटी रोस्टर, डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ़ की चौबीसों घंटे उपलब्धता सुनिश्चित करें। बैठक में बच्चों और बुज़ुर्गों पर विशेष ध्यान देने पर जोर दिया गया। अस्पतालों को निर्देश दिए गए कि वे संवेदनशील आयु वर्गो के मरीजों की समय पर जांच और उचित देखभाल सुनिश्चित करें।
स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पतालों को यह भी निर्देश दिया कि वे इमरजेंसी विभागों में समर्पित ‘फ्लू कॉर्नर’ बनाएं और इमरजेंसी ड्यूटी के लिए सीनियर रेजिडेंट्स डॉक्टरों को तैनात करें। जिन संदिग्ध मरीज़ों में लक्षण दिखें, उनकी तुरंत जांच होनी चाहिए और जहां जरूरी हो, वहां स्वैब सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे जाएं। अस्पतालों को यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया कि वायरल ट्रांसपोर्ट मीडियम (वीटीएम) और सांस से जुड़े सैंपल लेने और जांच के लिए ज़रूरी अन्य सामान पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हों।
बैठक में अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता की भी समीक्षा की गई। अस्पताल प्रशासन को जरूरी दवाओं की उपलब्धता पर नियमित रिपोर्ट देने और पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। जहां भी जरूरी हो अस्पतालों को सलाह दी गई है कि वे मरीज़ों की देखभाल में किसी भी तरह की रुकावट से बचने के लिए ज़रूरी दवाओं की स्थानीय स्तर पर खरीद करें।
मंत्री ने इन्फ्लूएंजा के लक्षणों, सावधानियों और सही इलाज के लिए जरूरी व्यवहार के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए मरीज़ों और उनके साथ आने वाले लोगों के लिए जरूरी जानकारी वाले साफ़ और आसानी से दिखने वाले बैनर लगाने पर भी विशेष बल दिया। विशेष रूप से आपातकालीन विभागों और अधिक भीड़ वाले स्थानों पर ऐसी सामग्री प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए, ताकि लोगों को इन्फ्लुएंजा के लक्षणों, बचाव के उपायों और उचित समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने के संबंध में जागरूक किया जा सके।
बैठक के बाद स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि इस समीक्षा बैठक का मकसद अस्पतालों की तैयारियों को और ज्यादा मजबूत करना है। हर अस्पताल किसी भी स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पूरी तरह सक्षम हो और साथ ही लोगों में किसी भी प्रकार की अनावश्यक घबराहट न हो इसको सुनिश्चित करना है।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि यह बैठक सिर्फ निर्देश देने के लिए नहीं थी, बल्कि हमारे अस्पतालों की तैयारियों की व्यापक समीक्षा की गई। हमारे डॉक्टर और मेडिकल टीमें पूरी मेहनत के साथ बेहतरीन काम कर रही हैं। हमने बेड, टेस्टिंग सुविधाओं, दवाओं और इमरजेंसी सेवाओं की उपलब्धता की समीक्षा की है ताकि मरीज़ों की देखभाल में कोई कमी नहीं रहे।
स्वास्थ्य मंत्री ने राजाधानी दिल्ली के सभी नागरिकों से सतर्क रहने के साथ सलाह दी कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने सांस से जुड़ी स्वच्छता, सही तरीके से मास्क पहनने, हाथों की सफाई, खांसते-छींकते समय ज्यादा सावधानी बरतने और भीड़-भाड़ वाली जगहों पर लोगों को जाने से बचने (खासकर लक्षण होने पर) के महत्व पर फिर से विशेष ज़ोर दिया। जिन नागरिकों में फ्लू जैसे लक्षण दिख रहे हैं, खासकर जो लोग ज़्यादा जोखिम वाले समूहों में आते हैं, उन्हें सलाह दी गई है कि वे तुरंत डॉक्टर से सलाह लें और खुद से दवा लेने से बचें।









