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जेपीएससी-जेएसएससी आंदोलन: अमीषा प्रसाद ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल, सीबीआई जांच की मांग

रांची, 26 अगस्त । झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी)की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन के बीच आंदोलनकारी अमीषा प्रसाद ने पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बुधवार को रांची प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता कर आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर कई आरोप लगाए। अमीषा ने आरोप लगाया कि झूठे मुकदमों के जरिए छात्रों और युवाओं की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है।

अमीषा प्रसाद ने आंदोलनकारी छात्रों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने वाले शहबाज आलम पर भी निशाना साधा। उन्होंने उन्हें आमने-सामने बातचीत यानी टेबल टॉक की खुली चुनौती दी। अमीषा ने कहा कि यदि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप सही हैं तो संबंधित पक्ष सामने आकर उन आरोपों के प्रमाण पेश करे। आमने-सामने बातचीत से यह स्पष्ट हो सकता है कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।

दरअसल, शहबाज आलम की ओर से अमीषा प्रसाद के खिलाफ दंगा फैलाने और मारपीट जैसे आरोपों में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। हालांकि, अमीषा का दावा है कि आंदोलन के दौरान छात्रों ने किसी भी तरह के प्रोटोकॉल का उल्लंघन नहीं किया।

अमीषा प्रसाद ने पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि उन्हें बिना किसी पूर्व नोटिस या वारंट के घर से हिरासत में लिया गया और करीब छह से सात घंटे तक रखा गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सदर थाना प्रभारी की ओर से उन्हें पुराने मामलों में फंसाने का प्रयास किया गया। अमीषा के मुताबिक, मीडिया के सामने भी उनके संबंध में गलत जानकारी दी गई।

प्रेस वार्ता में जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच ने आरोप लगाया कि करीब 14 पुरुष छात्रों, जिनमें रविंद्र और कुणाल सर समेत अन्य लोग शामिल हैं, के खिलाफ छेड़खानी जैसे गंभीर आरोपों में कथित रूप से झूठी प्राथमिकी दर्ज की जा रही है।

मंच से जुड़ी छात्राओं ने इन आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि कानून का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल कर निर्दोष छात्रों को फंसाने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से छात्रों का भविष्य प्रभावित हो सकता है।

जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच की कोर सदस्य प्रतिमा कुमारी ने प्रशासन पर दोहरे रवैये का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि एक पुतला दहन कार्यक्रम के दौरान छात्रों के समर्थन में पहुंची महिलाओं के साथ मारपीट और बदसलूकी की गई।

प्रतिमा के अनुसार, इस मामले में शिकायत दर्ज कराने के लिए वह लगातार दो दिनों तक थाने के चक्कर लगाती रहीं, लेकिन पुलिस ने उनकी प्राथमिकी दर्ज नहीं की। मंच ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य के अलग-अलग जिलों में पुलिस की मौजूदगी में छात्रों पर बल प्रयोग किया गया।

प्रेस वार्ता में मंच ने जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच सीआईडी के बजाय सीबीआई से कराने की मांग दोहराई। इसके साथ ही आंदोलनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज कथित फर्जी मुकदमे वापस लेने और जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को यूपीएससी के माध्यम से कराने की मांग भी रखी गई।

अमीषा प्रसाद ने मुख्यमंत्री से अधिकारियों के माध्यम से आंदोलन की जानकारी लेने के बजाय सीधे छात्रों से बातचीत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि छात्रों की बात सुनी जानी चाहिए और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

मंच ने चेतावनी दी कि यदि छात्रों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कर आंदोलन को दबाने की कोशिश जारी रही और उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।————-