यूपीएससी अभ्यर्थी से दुष्कर्म, हत्या और लूटकांड: 973 पन्नों की चार्जशीट दाखिल, 82 गवाहों के सहारे पुलिस का मजबूत केस
नई दिल्ली, 17 जुलाई । दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के ईस्ट ऑफ कैलाश स्थित कैलाश हिल्स में यूपीएससी की तैयारी कर रही युवती से दुष्कर्म, हत्या और लूट के बहुचर्चित मामले में दिल्ली पुलिस ने जांच पूरी कर गुरुवार काे अदालत में 973 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल कर दी है। पुलिस का दावा है कि वैज्ञानिक साक्ष्यों, डीएनए रिपोर्ट, फिंगरप्रिंट, सीसीटीवी फुटेज, घटनास्थल के पुनर्निर्माण और अन्य तकनीकी जांच के आधार पर आरोपित के खिलाफ मजबूत साक्ष्य जुटाए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 18 जुलाई को होगी।
दक्षिण-पूर्वी जिले के पुलिस उपायुक्त डाॅ. हेमंत तिवारी ने शुक्रवार को जानकारी देते हुए बताया कि, यह वारदात 22 अप्रैल को अमर कॉलोनी थाना क्षेत्र के कैलाश हिल्स में हुई थी। यूपीएससी की तैयारी कर रही एक युवती अपने घर में मृत मिली थी। जांच में सामने आया कि उसके साथ पहले दुष्कर्म किया गया और फिर हत्या कर दी गई। वारदात के बाद आरोपी घर से कीमती सामान भी लूटकर फरार हो गया था।
घटना की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में कई विशेष जांच टीमें गठित की गईं। पुलिस ने शुरुआत से ही वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों पर फोकस किया। घटनास्थल की जांच सीएफएसएल लोधी कॉलोनी और एफएसएल मधुबन चौक, रोहिणी के विशेषज्ञों से कराई गई। मौके से मिले हर साक्ष्य को सुरक्षित कर फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया।
जांच के दौरान पुलिस ने इलाके और आसपास लगे 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। इन फुटेज के जरिए आरोपित के घटनास्थल तक आने और वारदात के बाद भागने के पूरे रूट का पता लगाया गया। सीसीटीवी विश्लेषण के आधार पर पुलिस ने 23 वर्षीय राहुल कुमार मीणा की पहचान की और लगातार प्रयासों के बाद उसे वारदात वाले दिन ही गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के अनुसार आरोपित की निशानदेही पर लूटा गया पूरा सामान भी बरामद कर लिया गया। जांच के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि सबूतों की पूरी श्रृंखला मजबूत रहे, ताकि अदालत में अभियोजन पक्ष का मामला मजबूत बन सके।
जांच टीम में इंस्पेक्टर लोकेन्द्र, इंस्पेक्टर रिजवान खान, एसआई मनमोहन, हेड कांस्टेबल राजेश और कांस्टेबल लखन शामिल रहे। टीम ने पड़ोसियों, सुरक्षा गार्डों, घरेलू सहायकों, मजदूरों, ड्राइवरों, सफाई कर्मचारियों, ऑटो और कैब चालकों समेत बड़ी संख्या में लोगों से पूछताछ की। वहीं साक्ष्य जुटाने और आरोपी की गतिविधियों की पुष्टि के लिए राजस्थान, हरियाणा, उप्र और दिल्ली के विभिन्न इलाकों में भी पुलिस टीमों को भेजा गया।
आरोपित की गिरफ्तारी के बाद उसकी मौजूदगी में घटनास्थल का पुनर्निर्माण कराया गया। इस पूरी प्रक्रिया की क्रमवार फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी की गई। आरोपित के घर में प्रवेश, अंदर की गतिविधियों और बाहर निकलने के तरीके का रिकॉर्ड तैयार किया गया। इसके साथ ही सीसीटीवी फुटेज और रीकंस्ट्रक्शन वीडियो का गेट पैटर्न एनालिसिस भी कराया गया।
जांच के दौरान सीएफएसएल विशेषज्ञों ने आरोपित का बिहेवियरल एनालिसिस इंटरव्यू और लेयर्ड वॉयस एनालिसिस (एलवीए) भी किया। घटनास्थल से मिले चांस फिंगरप्रिंट और हथेली के निशान आरोपित से मेल खा गए। इसके अलावा फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी डिवीजन द्वारा विभिन्न नमूनों की जांच की गई, जिसमें फोरेंसिक रिपोर्ट पुलिस के दावों के अनुरूप पाई गई। सबसे अहम साक्ष्य के रूप में डीएनए प्रोफाइलिंग में भी आरोपित का डीएनए जांच के दौरान मिले जैविक साक्ष्यों से मेल खा गया।
पुलिस ने जांच के दौरान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 183 के तहत आवश्यक बयान दर्ज किए। अभियोजन पक्ष ने इस मामले में 82 गवाहों को सूचीबद्ध किया है। सभी कानूनी, वैज्ञानिक और प्रक्रियागत औपचारिकताएं पूरी करने के बाद 16 जुलाई 2026 को 973 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट अदालत में दाखिल की गई। अब 18 जुलाई को अदालत में इस मामले पर आगे की सुनवाई होगी। दिल्ली पुलिस का कहना है कि इस जघन्य मामले में त्वरित कार्रवाई, वैज्ञानिक जांच और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपित के खिलाफ मजबूत केस तैयार किया गया है, जिससे अदालत में प्रभावी अभियोजन सुनिश्चित किया जा सके।









