मप्र विधानसभा में उठा खाद-बीज की कमी और अवर्षा का मुद्दा, सरकार ने दिया जवाब
भोपाल, 20 जुलाई । मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को किसानों की समस्याओं को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के जमकर नोंकझोक हुई। मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने सदन में खाद-बीज की कमी और अवर्षा का मुद्दा उठाया, जिस पर सरकार ने जवाब दिया।
विधानसभा की कार्यवाही के दौरान दोपहर बाद विपक्ष ने नियम 139 के अंतर्गत किसानों को खाद-बीज नहीं मिलने और अवर्षा से बने हालात का मामला उठाया। कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत ने कहा कि किसानों को लेकर सरकार उपलब्धियां गिनाती है, लेकिन वास्तविक स्थिति अलग है। शहरों के मास्टर प्लान बनते हैं लेकिन ग्रामीण क्षेत्र का मास्टर प्लान कहां है? हजारों क्विंटल अनाज का उत्पादन होता है लेकिन गोदामों की स्थिति क्या है? अनाज सड़ जाता है, उसमें कीड़े पड़ जाते हैं। आदमी के खाने लायक नहीं रहता। बोरा खरीदी में घपला हो गया।
कांग्रेस विधायक शेखावत जब किसानों की समस्या बता रहे थे, उसी समय संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय उठे। उन्होंने कहा कि यह शेखावत जी की पुरानी टेप चल रही है। इस पर शेखावत ने कहा कि पुरानी टेप नहीं है, किसानों की समस्या का मामला है। किसान अगर कमजोर हो गया तो शहरों का धंधा भी चौपट हो जाएगा। किसानों की समस्या को गंभीरता से लेने की जरूरत है। तमाशा मत बनाओ, किसान हमारा बाप है। इसके साथ खेल खेला तो वहां यानी सत्ता पक्ष से यहां यानी विपक्ष में बैठा देगा।
टीकमगढ़ से कांग्रेस विधायक यादवेंद्र सिंह ने विधानसभा में किसानों को खाद वितरण का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि किसान यूरिया या डीएपी मांगते हैं, लेकिन उन्हें दूसरी तरह की खाद थमा दी जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का टोकन सिस्टम पूरी तरह फेल हो चुका है। कई जिलों में किसानों को सिर्फ एक बोरी खाद दी जा रही है, जिससे वे भारी परेशानी झेल रहे हैं। इस पर उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल और भाजपा विधायकों ने कहा कि किसानों को रासायनिक खाद पर निर्भरता कम कर जैविक और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ना चाहिए।
इस पर पूर्व कृषि मंत्री और कांग्रेस विधायक सचिन यादव ने कहा कि जैविक खेती को बढ़ावा देना अच्छी पहल है, लेकिन इसके अनुरूप किसानों को जरूरी सुविधाएं भी मिलनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि जैविक खेती के नाम पर किसानों को रासायनिक खाद उपलब्ध नहीं कराना सरकार की बड़ी कमजोरी है। उज्जैन से कांग्रेस विधायक महेश परमार ने विधानसभा में किसानों के मुद्दे उठाते हुए कहा कि वोट देने के बाद किसान दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है। उन्होंने कहा कि यदि आधुनिक तकनीक की कमी है तो किसानों को उसका प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।
परमार ने कहा कि डीजल, खाद और बीज की कीमतें कई गुना बढ़ चुकी हैं, जिसका असर किसानों पर पड़ रहा है। उन्होंने फसल बीमा कंपनियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि किसानों के साथ लूट हो रही है। साथ ही मांग की कि किसानों के हित में मंडी समितियों के चुनाव कराए जाएं, लेकिन सरकार इस दिशा में कोई कदम नहीं उठा रही है।
खाद-बीज पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक बाला बच्चन ने फसल बीमा योजना पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि पिछले पांच वर्षों में बीमा कंपनियों ने किसानों से करीब 10 हजार करोड़ रुपये का फायदा कमाया, जबकि बदले में नाममात्र का मुआवजा दिया गया। बच्चन ने मांग की कि सरकार बताए कि पांच साल में उसने कितना प्रीमियम दिया, किसानों से कितना अंशदान लिया गया और बीमा कंपनियों ने कितना मुआवजा वितरित किया। उन्होंने कहा कि यदि इन आंकड़ों की जांच हो जाए तो पूरी तस्वीर सामने आ जाएगी।
कांग्रेस विधायक सोहनलाल वाल्मीकि ने विधानसभा में कहा कि किसान की सबसे बड़ी पीड़ा यह है कि अपनी ही फसल का दाम तय करने का अधिकार उसके पास नहीं होता। उन्होंने कहा कि किसान सालभर बीज खरीदने, फसल बोने, उसकी देखभाल करने और खाद देने के बाद अनाज तैयार करता है, लेकिन जब वह मंडी पहुंचता है तो उसकी उपज का भाव दलाल और व्यापारी तय करते हैं। वाल्मीकि ने कहा कि किसान मजबूरी में उसी कीमत पर अपनी फसल बेचने को विवश हो जाता है और चाहकर भी अपनी उपज का उचित मूल्य तय नहीं कर पाता।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विधानसभा में खाद-बीज संकट पर सरकार को घेरते हुए कहा कि सरकार हर साल पर्याप्त भंडारण का दावा करती है, फिर भी किसानों को समय पर खाद और बीज नहीं मिल पाता। उन्होंने कहा कि कम बारिश होने पर दोबारा बुआई करनी पड़ती है, जिससे पशुओं के चारे और दूध उत्पादन पर भी असर पड़ेगा। सिंघार ने कहा कि “अगर सरकार के पास यूरिया है तो किसान लाइन में क्यों खड़ा है? किसान को खाद नहीं मिल रहा, सिर्फ OTP मिल रहा है और वह उसी के साथ भटकता रहता है।” उन्होंने आरोप लगाया कि खरीदी के समय सर्वर डाउन होने का बहाना बनाया जाता है। साथ ही सुझाव दिया कि पंचायत स्तर पर ही खाद का वितरण किया जाए, ताकि कालाबाजारी पर रोक लग सके। उन्होंने राज्य सरकार की आर्थिक स्थिति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि हर काम के लिए केंद्र पर निर्भर रहना पड़ता है और प्रदेश कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है।
खाद-बीज पर चर्चा का जवाब देते हुए कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना ने कहा कि पहले खाद वितरण के दौरान लंबी लाइनें लगती थीं और “कांग्रेस के लोग अपने समर्थकों को लाइन में घुसाकर विवाद की स्थिति बनाते थे।” उन्होंने कहा कि अब ऐसी स्थिति नहीं है। यदि कहीं खाद का संकट है तो विधायक बताएं, सरकार तत्काल व्यवस्था करेगी। कंसाना ने कहा कि अगर किसानों को खाद-बीज नहीं मिल रहा होता तो मध्य प्रदेश को सात बार कृषि कर्मण पुरस्कार कैसे मिलता।
उन्होंने कांग्रेस विधायक सचिन यादव के किसानों की समस्याओं पर समिति बनाने के सुझाव से सहमति जताते हुए कहा कि इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री से भी चर्चा हुई है। मंत्री ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि किसानों को खाद नहीं मिलने की बात गलत है। उन्होंने विपक्ष से कहा, “सदन में झूठ बोलना बंद कर दो, बारिश होगी।”









