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गुरु पूर्णिमा पर ब्रह्म विद्या विहंगम योग संत समाज ने किया सत्संग, सेवा-आध्यात्मिक साधना का दिया संदेश

खूंटी, 29 जुलाई । गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर बुधवार को ब्रह्म विद्या विहंगम योग संत समाज, खूंटी के तत्वावधान में भव्य सत्संग, सर्वेद पाठ और आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर गुरु परंपरा का स्मरण किया और आध्यात्मिक साधना में सहभागिता निभाई।

कार्यक्रम की शुरुआत विश्व के आध्यात्मिक ग्रंथ सर्वेद के पाठ और सत्संग से हुई। इसके बाद श्रद्धालुओं ने सद्गुरु सदाफल देव जी महाराज, धर्मदेव जी महाराज तथा वर्तमान सद्गुरु स्वामी स्वतंत्र देव जी महाराज का श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए महाआरती में भाग लिया।

इस अवसर पर वक्ताओं ने गुरु पूर्णिमा के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ब्रह्म विद्या विहंगम योग केवल आध्यात्मिक साधना तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज सेवा के विभिन्न क्षेत्रों में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। संगठन की ओर से गौसेवा, जरूरतमंदों के बीच निशुल्क दूध वितरण, पौधारोपण, रक्तदान, निशुल्क शिक्षा सहित अनेक जनकल्याणकारी कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।

वक्ताओं ने बताया कि संगठन के गुरुकुलों में विद्यार्थियों को आध्यात्मिक शिक्षा के साथ जीवनोपयोगी एवं संस्कारयुक्त शिक्षा भी प्रदान की जाती है, ताकि वे समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सार्थक भूमिका निभा सकें।

सत्संग के दौरान श्रद्धालुओं को बताया गया कि प्रयागराज (झूंसी) स्थित ब्रह्म विद्या विहंगम योग के मुख्यालय तथा वाराणसी के उमरहा स्थित सर्वेद महामंदिर धाम में भी गुरु पूर्णिमा महापर्व श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। बताया गया कि सर्वेद महामंदिर धाम में एक समय में लगभग 20 हजार श्रद्धालु एक साथ साधना कर सकते हैं।

वक्ताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी सर्वेद महामंदिर धाम पहुंचकर सद्गुरु का आशीर्वाद प्राप्त कर चुके हैं।

खूंटी संत समाज के प्रधान संयोजक जितेंद्र कश्यप ने बताया कि संगठन जिले के विभिन्न प्रखंडों में सत्संग, साधना और सेवा कार्यों के माध्यम से लोगों को आध्यात्मिक जीवन से जोड़ने का सतत प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा का पर्व गुरु के प्रति श्रद्धा, समर्पण और आत्मिक उन्नति का संदेश देता है तथा समाज को सेवा और संस्कार के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।———-