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अभाविप ने निकाली शोभा यात्रा, खुले अधिवेशन में कार्यकर्ताओं ने दिया भाषण

ग़ाज़ी मियाँ का उद्देश्य स्पष्ट था – भारत की भूमि पर इस्लाम का विस्तार, हिंदू धर्मस्थलों का विध्वंस, और स्थानीय जनों को दास बनाना। उसने अपने विशाल तुर्की सेनाओं के साथ बहराइच की ओर कूच किया, जहां पर वह कुछ वर्षों में कई छोटे-छोटे हिंदू राज्यों को रौंदता हुआ आगे बढ़ा। उसके अत्याचारों की गूंज सरयू सरयू की घाटियों तक सुनाई देने लगी थी।

आपातकाल पर भाषण देते हुए प्रांत मंत्री अर्पण कुशवाहा ने 25 जून 1975 का दिन भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास का सबसे काला अध्याय है, जिसकी विभीषिका को राष्ट्र कभी भुला नहीं सकता। जेलों की काल कोठरियों में डाले गए निर्दोष नागरिकों की पीड़ा, उनके परिवारों की व्यथा और लोकतंत्र पर किए गए क्रूरतम आघात की गाथा इतिहास के पन्नों में सदा अंकित रहेगी। रातों-रात आपातकाल थोपकर कांग्रेस ने यह साबित कर दिया कि उसके लिए सत्ता सर्वोपरि है, लोकतंत्र और संविधान नहीं।

वक्ताओं में अभिनव सिंह खालसा ने हिंदू की चादर गुरु तेग बहादुर पर ,शिवम मिश्रा ने सांस्कृत पर्यटन एवं रोजगार की संभावनाएं,आशुतोष श्रीवास्तव ने स्वभाषा से स्वावलंबन,कुमारी जयश्री रावत ने विकसित भारत 2047 में मातृशक्ति की भूमिका एवं उसके योगदान,तथा मुकेश सोनी ने आपताल लोकतंत्र की रक्षा के लिए युवाओं का संघर्ष विषय पर भाषण दिया। इस अवसर पर प्रान्त अध्यक्ष प्रो.नीतू सिंह प्रमुख रूप से उपस्थित रहीं।