भ्रष्टाचार का भंडाफोड़: पुलिस रिश्वत-रैकिट में अव्वल, पटवारी और दलाल पीछे नहीं!
प्रदेश के भ्रष्टाचार के प्रति गंभीरता को देखते हुए हाल के आंकड़े बताते हैं कि 2024 में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने 245 सरकारी कर्मचारियों और उनके सहयोगियों को गिरफ्तार किया है। यह आंकड़ा 2023 की तुलना में कम है, जब ये मामले 284 तक पहुँच गए थे। इन 245 मामलों में की गई कार्रवाइयों में 43 प्रकरण राजपत्रित अधिकारियों के खिलाफ थे, जबकि 202 अराजपत्रित कर्मचारी और प्राइवेट दलाल शामिल थे। यह वर्ष 2023 के मुकाबले रिश्वत के मामलों में 39 कम आरोपियों की गिरफ्तारी का संकेत देता है।
सबसे ज्यादा रिश्वत के मामले विभिन्न विभागों में दर्ज किए गए हैं, जिसमें पुलिस, राजस्व और बिजली वितरण कंपनी (डिस्कॉम) शामिल हैं। मार्च 2024 से अप्रैल 2025 के बीच एसीबी ने पुलिस विभाग से संबंधित 47 मामले दर्ज किए, जो कुल मामलों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस दौरान पुलिस महकमे के 16 कांस्टेबलों को रिश्वत लेते समय पकड़ा गया, इसके अलावा 14 हेड कांस्टेबल, 9 सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) और 8 उपनिरीक्षक (एसआई) भी शामिल थे। यह दिखाता है कि पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार की समस्या अभी भी गंभीर बनी हुई है।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की कार्रवाई केवल पुलिस विभाग तक सीमित नहीं रही। शिक्षण संस्थानों के संबंधित मामलों में भी एक दर्जन से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें सरकारी और प्राइवेट संस्थानों के कर्मचारी शामिल हैं। यही नहीं, पीएचईडी और जल संसाधन विभाग से भी रिश्वत मांगने के कई मामले सामने आए हैं। कुल मिलाकर, प्रदेश के कई महत्वपूर्ण विभागों में भ्रष्टाचार के संकेत मिले हैं, जिसमें पशुपालन, समाज कल्याण, चिकित्सा, परिवहन, और वाणिज्य कर आदि शामिल हैं।
गौर करने वाली बात यह है कि एसीबी ने सिर्फ सरकारी विभागों पर ही ध्यान केंद्रित नहीं किया है, बल्कि उन्होंने दलालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की है। पिछले वर्ष में कुल 36 दलाल भी एसीबी के पकड़ में आए हैं, जो सरकारी कामों में बाधा डालते हुए रिश्वत मांगते पाए गए। इसके अलावा, डिस्कॉम में भी 15 कर्मियों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा है, जो बिजली आपूर्ति और बिलों में संशोधन के लिए रिश्वत लेते पकड़े गए हैं।
इस प्रकार, एक ओर जहां पिछले साल की तुलना में बुरे आरोपियों की संख्या कम हुई है, वहीं दूसरी ओर यह भी स्पष्ट है कि भ्रष्टाचार की समस्या अभी भी प्रचलित है। सरकार और प्रशासन को इस दिशा में और सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि जनता को न्याय और पारदर्शिता का एहसास हो सके। एसीबी की कार्यवाही से यह अपेक्षित है कि निर्धारित दिशा में काम जारी रहेगा और भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम को और तेज किया जाएगा।









