श्री राम शरणम् आश्रम में भक्ति भाव से संपन्न हुआ रामायण ज्ञान यज्ञ!
**लुधियाना में आयोजित हुआ श्री रामायण ज्ञान यज्ञ**
भास्कर न्यूज – लुधियाना स्थित श्री राम शरणम् आश्रम में श्रद्धा और भक्ति के साथ एक भव्य श्री रामायण ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया गया। इस पवित्र अवसर पर मां रेखा, आशिमा बेदी, तथा संयम बेदी भल्ला ने रामायण के पाठ की चौपाईयों का पारायण किया। कार्यक्रम की अगुवाई करते हुए संस्था प्रमुख अश्विनी बेदी महाराज ने बताया कि सत्यानंद जी महाराज द्वार रचित वाल्मीकि रामायण एक अत्यंत मधुर और रसपूर्ण काव्य है, जिसे सुनने और पढ़ने से श्रद्धालुओं की सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं। उन्होंने इस ग्रंथ के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह कायरों को वीरता प्रदान करने की अद्भुत क्षमता रखता है।
अश्विनी बेदी महाराज ने आगे कहा कि श्री रामायण में राष्ट्र भक्ति का एक गहरा संदेश छुपा हुआ है। उन्होंने उदाहरण देते हुए लक्ष्मण जी और हनुमान जी की श्री राम प्रति आज्ञाकारिता की चर्चा की एवं कहा कि हमें भी श्री राम जी के द्वारा बताए गए मार्ग पर चलने का प्रयास करना चाहिए। उनका उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि रामायण की यह कथा मानव कल्याण का लक्ष्य रखती है और इसमें जीवन का गूढ़ सार उपस्थित है।
ज्ञान यज्ञ के अंतर्गत पाठ का महत्व स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि इस पाठ के नियमित अभ्यास से व्यक्ति की जीवन की कठिनाइयों और दिक्कतों में कमी आती है। इस अवसर पर भजन मंडल ने ‘श्रीराम जय राम जय जय राम’ के जयकारों और भजनों से श्रद्धालुओं का मनोहारी अनुभव प्रदान किया। अंत में, श्री राम आरती का आयोजन किया गया, जिससे पूरे वातावरण में भक्ति का संचार हुआ।
इस धार्मिक सभा में कई प्रमुख व्यक्ति भी उपस्थित हुए, जिनमें राज मित्तल, टीटू पायलट, गुलाब राय, रामेश्वर गुप्ता, सुमुन जैन, सुदर्शन जैन, मधु बजाज, राजिन्द्र नारंग, आशु जैन, वरिंद्र जैन, हिमांशु धवन, शशि गुप्ता, किरण खरबंदा, शुचिता दुग्गल और संजीव धवन शामिल रहे। इस विशेष अवसर पर रमणीक बेदी ने श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया, जिससे समारोह का महत्व और बढ़ गया।
इस भव्य यज्ञ ने न केवल भक्तों की आस्था को प्रदर्शित किया, बल्कि रामायण के प्रति श्रद्धा और भक्ति को और भी दृढ़ किया। यह आयोजन दर्शाता है कि भक्ति की शक्ति से मनुष्य अपने जीवन की कठिनाइयों को पार कर सकता है और सच्चे मार्ग पर चल सकता है। ऐसे आयोजनों का उद्देश्य समाज में एकता और समर्पण की भावना को बढ़ावा देना है, जिससे हम सब मिलकर एक सशक्त और प्रेरित समाज की दिशा में बढ़ सकें।









