संभल में 16 कूपों की खोज, कल्कि मंदिर का सर्वाधिक जर्जर, 29 तीर्थों की तलाश!
संभल के मोहल्ला खग्गू सराय में 14 दिसंबर, 2024 को एक प्राचीन कुएं की खोज के साथ ही प्रशासन ने एक विशेष अभियान की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य प्राचीन तीर्थ और कुओं का पता लगाना था। अब तक इस अभियान के दौरान कुल 42 तीर्थ और 16 महाकूप का पता लगाया जा चुका है। महाकूप ऐसे कुएं होते हैं, जिनमें पानी नहीं होता, लेकिन पूजा-पाठ के लिए उनका महत्व होता है। इस अभियान की निरंतरता पिछले तीन महीनों से बनी हुई है, और अब इन कुओं की स्थिति का जायजा लेने के लिए ‘दैनिक भास्कर’ ने ग्राउंड जीरो पर जाकर जानकारी जुटाई।
हमारी जांच में सामने आया कि 16 महाकूप में से 13 कुओं को ईंटों से चारों ओर पक्की संरचना देकर और लोहे के जाल से ढक दिया गया है। इसके अतिरिक्त, प्राचीन श्री कल्कि मंदिर का कूप सबसे अधिक खस्ताहाल स्थिति में है। जबकि 42 तीर्थ स्थलों में से दो का सौंदर्यीकरण का कार्य आरंभ किया गया है, शेष तीर्थ स्थलों पर केवल मनरेगा योजना के तहत सफाई कराई गई है। संभल प्रशासन ने इन कुओं के और तीर्थों के सौंदर्यीकरण के लिए तीन योजनाओं के तहत प्रस्ताव भेज दिए हैं। आशा व्यक्त की जा रही है कि इस साल के अंत तक संभल नगरी का स्वरूप काफी बदल जाएगा।
हमने कूपों की वर्तमान स्थिति का पता लगाने के लिए सबसे पहले मोहल्ला आलम सराय में चतुर्मुख कूप का दौरा किया। यहां पक्की संरचना के साथ एक बाउंड्री दीवार बनाई गई है। इसके बाद हम मोहल्ला हल्लू सराय के अशोक कूप पर पहुंचे, जहां केवल बाउंड्री डाली गई है। सरथल पुलिस चौकी चौराहे पर पाया गया कूप ज्यों का त्यों है, जिसे केवल सफाई दी गई है। वहीं, श्री सार्थलेश्वर महादेव और मुक्तेश्वर महादेव मंदिर में पहले से बने कूपों पर कोई कार्य नहीं हुआ है।
मोहल्ला कोटपूर्वी में प्राचीन श्री कल्कि मंदिर का कुआं अपनी जर्जर स्थिति में है। तीन महीने पहले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की राजकीय टीम ने यहां कुछ सफाई कार्य कराया था, लेकिन वर्तमान में फिर से लंबी झाड़ियां उग आई हैं। जामा मस्जिद के अंदर स्थित कूप का भी विशेष ध्यान नहीं रखा जा सका है, क्योंकि यह विवादित ढांचे के अंदर आता है।
अब तीर्थ स्थलों की बात करें, तो यहां केवल यमघट और सूर्यकुंड तीर्थ पर विकास कार्य चल रहा है। यमघट स्थल का सौंदर्यीकरण कार्य मंत्री गुलाब देवी के शुभारंभ के साथ हो रहा है। वहीं, सूर्यकुंड तीर्थ के अंदर भी बाउंड्रीवाल और पार्क बनाने पर काम जारी है। पार्षद वेदप्रकाश ने बताया कि यम तीर्थ के चारों ओर दीवारें बनाने के साथ-साथ एक नया कुंड भी बनाया जाएगा, जिसमें यमदेव की मूर्ति स्थापित की जाएगी। DM डॉ. राजेंद्र पेंसिया ने बताया कि संभल के तीर्थ और कूपों के विकास के लिए कई योजनाएं चल रही हैं, जिससे आशा व्यक्त की जा रही है कि इस नगरी का स्वरूप संतुलित विकसित होगा।
कुल मिलाकर, संभल में प्राचीन तीर्थों और कुओं के सौंदर्यीकरण का कार्य एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों का संरक्षण होगा और पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकेगा।









