भावनाओं की भूचाल: ‘लोहा कुट्ट’ में रिश्तों का जटिल जाल और प्यार की कसक!
भास्कर न्यूज | अमृतसर में गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के ड्रामा क्लब और आवाज रंगमंच टोली द्वारा आयोजित नाटक मेले का तीसरा दिन दर्शकों के लिए खास रहा, जिसमें ‘लोहा कुट्ट’ नाटक का मंचन किया गया। यह नाटक प्रख्यात लेखक बलवंत गर्गी की कृति है और इसे अमृतसर के कलाकारों ने रंगमंच निर्देशक मंचप्रीत के निर्देशन में प्रस्तुत किया। नाटक में सामाजिक रिश्तों और मानवीय व्यवहार को स्पष्टता के साथ दर्शाया गया है, जो दर्शकों को गहराई से प्रभावित करता है।
‘लोहा कुट्ट’ की कहानी एक लोहार काकू और उसकी पत्नी के अंतर्संबंधों के इर्द-गिर्द घूमती है। काकू तो लोहे को तोड़ने में माहिर है, लेकिन अपनी पत्नी के भावनात्मक जटिलताओं को समझ पाने में असमर्थ है। उसकी पत्नी की मनोभावनाएँ और अपेक्षाएँ उसे जीवनभर परेशान करती हैं। नाटक में दिखाया गया है कि जब काकू की पत्नी उसकी पहली मोहब्बत से संपर्क करती है, तो वह खुद से संघर्ष करती है और बगावत के मार्ग पर अग्रसर होती है। इस प्रस्तुति में महिला-पुरुष के रिश्ते, पारिवारिक संबंध, प्रेम एवं जुदाई जैसे मामलों को बेबाकी से उजागर किया गया है।
मंचप्रीत और उनकी टीम ने नाटक के माध्यम से केवल नाटक की कहानियों को नहीं, बल्कि समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश भी दिया। इस कार्यक्रम में बीएसएफ के डिप्टी कमांडर एस.बी. सागर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि कला प्रेमी सतवीर सिंह ने विशेष अतिथि की भूमिका निभाई। पंजाबी विभाग के प्रमुख डॉ. मनजिंदर सिंह ने भी इस नाटक को देखकर यह स्पष्ट किया कि ‘लोहा कुट्ट’ बलवंत गर्गी की प्रसिद्ध रचनाओं में से एक है और इसे मंचप्रीत एवं उनकी टीम ने शानदार तरीके से प्रस्तुत किया है।
ड्रामा क्लब के कन्वीनर डॉ. सुनील कुमार ने कार्यक्रम में आए सभी मेहमानों और दर्शकों का आभार व्यक्त किया। इसके साथ ही मंच अमृतसर की टीम को उनकी उत्कृष्ट प्रस्तुति के लिए सम्मानित किया गया। इस अवसर पर कला प्रेमियों, शिक्षकों तथा नाटक प्रेमियों की एक बड़ी संख्या मौजूद थी, जिसमें कनवल रंधेआ, मनप्रीत सिंह चड्ढा, डॉ. बलजीत कौर, डॉ. यूबी गिल, डॉ. गुरविंदर सिंह एवं करमजीत संधू जैसे कई महत्वपूर्ण चेहरे शामिल थे।
शाम के कार्यक्रम ने दर्शकों के दिलों में छाप छोड़ दी। नाटक की गहराई और संवादों में अभिव्यक्ति ने उपस्थित सभी व्यक्तियों को सोचने को मजबूर कर दिया। इस प्रकार, यह नाटक मेले का तीसरा दिन उत्साह और संजीदगी के साथ संपन्न हुआ, जो दर्शकों के स्मरण में लंबे समय तक बना रहेगा। आगे चलकर इस तरह के और कार्यक्रमों की उम्मीद की जा रही है, जो समाज में बदलाव लाने और कला के प्रति लोगों की रुचि और बढ़ाएंगे।









