FIR के बाद जाट फिल्ममेकर्स ने ईसाई समाज से मांगी माफी, भावनाएं आहत करने का इरादा नहीं!

हाल ही में रिलीज हुई फिल्म “जाट” में एक विवादित दृश्य को लेकर निर्माताओं और फिल्म टीम के सदस्यों ने माफी मांगी है। फिल्म की टीम ने शुक्रवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से स्पष्ट किया, “हमारा उद्देश्य किसी भी धर्म या व्यक्ति की भावनाओं को आहत करना नहीं था।” उन्होंने यह भी बताया कि समाज की ओर से उठे रोष के मद्देनजर विवादित सीन को फिल्म से हटा दिया गया है और इस गलती के लिए खेद प्रकट किया है। माफी के इस पोस्टर के चलते निर्माताओं ने उन सभी से पुनः माफी मांगी है जिनकी भावनाएं आहत हुई हैं।

इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब पंजाब के जालंधर में ईसाई समुदाय ने फिल्म के कुछ दृश्यों के खिलाफ प्रदर्शन किया। ईसाई समाज का आरोप था कि फिल्म में चर्च से जुड़े दृश्यों ने उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाई है। इसके चलते जालंधर में विरोध प्रदर्शन के बाद सनी देओल, रणदीप हुड्डा और फिल्म से जुड़े अन्य चार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई। यह दायर की गई FIR यह सुनिश्चित करने के लिए थी कि कलाकारों और निर्माताओं के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए। जाट फिल्म 10 अप्रैल को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी, लेकिन इस विवाद के कारण इसकी चर्चा एक अलग ही दिशा में बढ़ गई।

फिल्म में विवादित दृश्य को लेकर ईसाई समुदाय के नेता विकलाव गोल्डी ने 15 अप्रैल को जालंधर कमिश्नरेट पुलिस को शिकायत दी थी। उन्होंने बताया कि रणदीप हुड्डा ने फिल्म में ईसा मसीह का अपमान किया और चर्च के अंदर खड़े होकर पवित्र वस्तुओं का अपमान किया। गोल्डी ने कहा कि फिल्म में दिखाया गया कि “प्रभु ईसा मसीह सो रहे हैं” और उन्होंने मुझे भेजा है, जोकि उनके धर्म के लिए अपमानजनक है। इस प्रकार के दृश्यों से इस बात की संभावना भी जताई गई कि इससे उन लोगों को बढ़ावा मिल सकता है जो ईसा मसीह के बारे में नकारात्मक सोच रखते हैं।

ईसाई समुदाय ने पुलिस से FIR दर्ज करने के लिए समय मांगा था, यह सुनिश्चित करने के लिए कि उनकी भावनाओं को अनदेखा न किया जाए। अगर पुलिस कार्रवाई नहीं करती, तो उन्होंने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन की चेतावनी दी थी। अंततः पुलिस ने गुरुवार को शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इस मामले की गंभीरता को गंभीरता से लिया गया है। इस घटना ने न केवल फिल्म उद्योग में चर्चाओं को जन्म दिया है, बल्कि धार्मिक भावनाओं की रक्षा के लिए भी एक महत्वपूर्ण कदम उठाने की आवश्यकता को उजागर किया है।